तीन बच्चों के चलते हाथ से निकल गई वार्ड पार्षद की कुर्सी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Jun 2024 11:34 PM

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नगर पंचायत, सुरसंड के वार्ड नंबर- 11 की उषा देवी के हाथ से वार्ड पार्षद की कुर्सी छीन गयी है

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सुरसंड. नगर पंचायत, सुरसंड के वार्ड नंबर- 11 की उषा देवी के हाथ से वार्ड पार्षद की कुर्सी छीन गयी है. चुनाव लड़ने के दौरान वह तीन बच्चों की मां थी, पर इस सच्चाई को छुपा लिया था और नामांकन के क्रम में कागजातों पर दो ही बच्चे होने का उल्लेख की थीं, जो अब खुलासा हुआ है. उन्हें वार्ड पार्षद की कुर्सी से हाथ धोना पड़ गया है. उनके खिलाफ राज्य निर्वाचन को शिकायत मिली थी. सुनवाई के बाद शिकायत को सच मानकर राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ दीपक प्रसाद ने उषा देवी को पदच्युत कर दिया है. साथ ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम को तथ्य छुपाकर चुनाव लड़ने के आरोप में उषा देवी के खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई करने को कहा है. बताया गया है कि सुरसंड उत्तरी पंचायत के वार्ड 14 निवासी रामनरेश बारिक ने आयोग से शिकायत की थी कि उषा देवी को चार अप्रैल 08 के बाद तीन बच्चे हुए. तीन बच्चों वाली अभ्यर्थी चुनाव नही लड़ सकती थी. इस तथ्य को उषा देवी ने छुपा लिया था कि उसके तीन संतान है. सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से डीपीआरओ उपेंद्र पंडित ने तथ्यों को उपलब्ध कराया था. बारिक के अधिवक्ता ने आयोग को बताया कि चुनाव के दौरान इसकी जानकारी देने के बावजूद निर्वाची अधिकारी द्वारा कोई संज्ञान नही लिया गया था. बताया कि उषा देवी की पुत्री सोनी कुमारी और पूत्र आयुष कुमार का जन्म भी चार अप्रैल 2008 के बाद ही हुआ है. इसके सबूत के तौर पर आधार कार्ड प्रस्तुत किया गया, जिसमें सोनी का जन्म 30 अगस्त 17 व आयुष का जन्म तिथि 29 मार्च 2019 अंकित है. बारिक की ओर से उक्त दोनों बच्चों का पीएचसी में हुए जन्म का कागजात भी प्रस्तुत किया गया. यानी पीएचसी के कागजात व आधार कार्ड में जन्म तिथि एक समान पाया गया. तीसरा संतान लाल मोहन है, जिसकी जन्मतिथि 11 जनवरी 16 है. बारिक ने आयोग को आंगनबाड़ी केंद्र पर उक्त तीनों बच्चों के नामांकन से संबंधित कागजात भी प्रस्तुत किया था, जिसमें उक्त तीनों बच्चों के माता के रूप में उषा देवी व पिता का नाम जयलाल मुखिया दर्ज है. केंद्र पर तीनों का नामांकन क्रमश: मई- 23, जून- 23 और जुलाई- 21 में हुआ था. बारिक द्वारा आयोग को सौंपे गए कागजातों की जांच जिला प्रशासन से कराई गई थी, जिसे सच करार दिया गया था. उषा देवी की ओर से यह तर्क दिया गया था कि तीनों जन्म प्रमाण पत्रों को क्रिएट किया गया है. हालांकि वह सबूत नहीं सौंप सकी. उनके इस तर्क को आयोग द्वारा खारिज कर दिया गया. महिला पर्यवेक्षिका और पीएचसी के प्रभारी ने भी प्रतिवेदन दिया था, जिसमें कॉट ऑफ डेट चार अप्रैल 08 के बाद तीनों बच्चे के जन्म होने की पुष्टि हुई है. सुनवाई के बाद आयोग ने उषा देवी को वार्ड पार्षद के पद से पदमुक्त करने के साथ ही डीएम को गलत हलफनामा और तथ्य छुपाने को लेकर धारा 477 व अन्य सुसंगत धाराओं के तहत उषा देवी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. कृत कार्रवाई से अवगत कराने को भी कहा गया है.

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