लखनदेई नदी के काले पानी से फसल तबाह होने का दावा, किसानों ने डीएम से की कार्रवाई और मुआवजे की मांग

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लखनदेई नदी का काला पानी: फसलें तबाह, किसान चिंतित

प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनदेई नदी में पिछले 10 दिनों से आ रहे काले, दुर्गंधयुक्त पानी ने सोनबरसा से रून्नीसैदपुर तक धान की फसलों को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है. प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और मुआवजे की मांग की है.

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Sitamarhi News: लखनदेई बचाओ संघर्ष समिति ने दावा किया है कि लखनदेई नदी का पानी पिछले करीब 10 दिनों से काला और दुर्गंधयुक्त हो गया है. समिति के अनुसार, यह पानी सोनबरसा से रून्नीसैदपुर तक बह रहा है, जिससे नदी किनारे के कई गांवों में धान की फसल और धान का बिचड़ा बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है.

समिति ने इस मामले में जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की है.

सैकड़ों एकड़ फसल नुकसान का दावा

लखनदेई बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य एवं अखिल भारत सर्वोदय मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. आनंद किशोर ने दावा किया कि प्रदूषित और काले पानी के कारण छोटी भारसर, खाप, खोपराहा, इटहरवा और दुलारपुर गांवों के खेतों में रोपी गई धान की फसल और धान का बिचड़ा गलकर नष्ट हो गया है.

उनके अनुसार, इससे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है.

नेपाल की चीनी मिल पर लगाया आरोप

समिति का आरोप है कि यह काला पानी नेपाल के सर्लाही जिले स्थित हरिऔन चीनी मिल और उसकी डिस्टिलरी से लखनदेई नदी में छोड़ा जा रहा है.

हालांकि, इस संबंध में संबंधित मिल या नेपाल के अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस समाचार तक सामने नहीं आई है.

तटबंध कटने से खेतों में फैला पानी

समिति के अनुसार, बागमती जलनिस्सरण विभाग ने खाप गांव में लखनदेई नदी पर बने छोटे पुल की सुरक्षा के लिए जुलाई में नदी की धारा रोककर दोनों ओर के तटबंध काट दिए थे.

समिति का कहना है कि इसी दौरान नेपाल से आया काला पानी खेतों में फैल गया, जिससे धान की फसल और बिचड़ा प्रभावित हुआ.

किसानों ने डीएम से की तीन प्रमुख मांगें

प्रभावित किसानों और समिति ने जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं—

  • नेपाल के अधिकारियों से वार्ता कर हरिऔन चीनी मिल और डिस्टिलरी द्वारा लखनदेई नदी में कथित प्रदूषित पानी छोड़े जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए.
  • प्रभावित गांवों का सर्वे कर फसल क्षति का आकलन कराया जाए और किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए.
  • भारत-नेपाल स्तर की बैठकों में लखनदेई नदी के प्रदूषण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए.

फिलहाल प्रशासन की ओर से इन मांगों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मामला किसानों की शिकायत और समिति के दावों के आधार पर उठाया गया है.


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राकेश कुमार राज

लेखक के बारे में

By राकेश कुमार राज

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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