कोलकाता प्रदर्शन में हिंसा के पीछे इस्लामी कट्टरपंथी और विदेशी ताकतें, नंदीग्राम में बोले शुभेंदु अधिकारी

Updated:
विज्ञापन

नंदीग्राम में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने NEET प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे छात्रों को नहीं, बल्कि इस्लामी कट्टरपंथियों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने दावा किया कि हिंसा में विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है.

विज्ञापन

Kolkata NEET Protest Violence: कारगिल विजय दिवस पर पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में 2 दिन पहले हुए नीट (NEET) प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को वाम समर्थित प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मीडियाकर्मियों पर हमला करने वाले लोग छात्र नहीं थे. ये लोग जमात-ए-इस्लामी के कट्टरपंथी थे. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस पूरी साजिश को विदेशी ताकतों का समर्थन प्राप्त था.

विज्ञापन

निष्पक्ष कार्रवाई और गुंडा एक्ट के तहत सजा

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि विधानसभा में वह कह चुके हैं कि लगभग 70 उपद्रवियों की पहचान की जा चुकी है. ये लोग नीट प्रश्नपत्र लीक का विरोध कर रहे वास्तविक छात्रों के आंदोलन से बिल्कुल नहीं जुड़े थे. चीफ मिनिस्टर ने चेतावनी दी कि पत्रकारों पर जानलेवा हमला करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जायेगा. उन्हें ऐसी सजा मिलेगी, जिसे उनकी अगली तीन पीढ़ियां याद रखेंगी.

ये भी पढ़ें: नीट पेपर लीक 2026: कलकत्ता हाईकोर्ट में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, दोषी पाये जाने पर 10 साल जेल और 10 करोड़ का जुर्माना

सरकार के फैसले से बौखलाये हैं कुछ तत्व : शुभेंदु

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा गैर-पंजीकृत मदरसों पर नकेल कसने, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाण पत्रों पर अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन कराने, अवैध पशु वध रोकने और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण जैसे कड़े फैसलों से कुछ असामाजिक तत्व बौखलाये हुए हैं और हिंसा का सहारा ले रहे हैं.

संसद में पेश होगा लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026

सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किये जाने वाले लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 की सराहना करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परीक्षा में धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का प्रमाण बताया.

ये भी पढ़ें: धर्मतला हिंसा में 7 FIR दर्ज, शुभेंदु अधिकारी बोले - ऐसी सजा देंगे कि 3 पीढ़ियां नहीं भूलेंगी

प्रस्तावित विधेयक के मुख्य प्रावधान

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट्स : पेपर लीक और परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए प्रत्येक राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित होंगे.
  • समयबद्ध जांच : किसी भी धांधली की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा.
  • कठोर दंड : दोषियों को न्यूनतम 5 साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक जेल और 50 लाख से 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है.


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola