मिथिला की भूमि प्रामाणिक है, जहां प्रभु राम ने माता अहिल्या का किया उद्धार : रामभद्राचार्य
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 May 2024 9:04 PM
माता सीता की प्राकट्य-भूमि, पुनौराधाम स्थित प्रेक्षागृह में जगतगुरु तुलसी पीठाधीश्वर श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने छठे दिन कथा को आगे बढ़ाया.
सीतामढ़ी. माता सीता की प्राकट्य-भूमि, पुनौराधाम स्थित प्रेक्षागृह में जगतगुरु तुलसी पीठाधीश्वर श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने छठे दिन कथा को आगे बढ़ाया. इससे पूर्व खुशबू झा द्वारा भजन सिया जी के भेलई जनमवा चलू हे करि आयी दर्शनवा…की भाव विभोर करने वाली प्रस्तुति दी गयी. अहिल्या स्थान की पुजारिन अवंतिका मिश्रा के जिज्ञासा का उत्तर देते हुए रामभद्राचार्य जी ने कहा कि अहिल्या माता ऋषि शदानंद जी की माता हैं. ऋषि परंपरा के नाते हम सबकी भी अहिल्या माता हैं. अहिल्या उद्धार भगवान ने अहिल्या स्थान में ही किया. गंगा पार करने के कुछ दिन बाद ही अहिल्या उद्धार प्रसंग आता है. मिथिला की भूमि प्रामाणिक है, जहां प्रभु राम ने माता अहिल्या का उद्धार किया, जो कमतौल के समीप है. अहिल्या माता को कठोर दंड क्यों दिया गया, इसका वर्णन बाल्मिकी रामायण में है. अहिल्या जान गयीं थीं कि इंद्र आए हैं. इंद्र से प्रेम कर ली. महाराज जनक के पुरोहित शदानंद की माता हैं. श्री हनुमान जी की माता अंजना अहिल्या की बेटी हैं. जिसकी बेटी हनुमान की माता हैं, वह क्षुद्र काम में कैसे फंस सकती हैं. अहिल्या को भस्म कर पत्थर की शिला में प्रविष्ट किया गया. दस हजार वर्ष की प्रतीक्षा के बाद राम के चरण स्पर्श से अहिल्या का उद्धार हुआ. जगद्गुरु ने कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान श्री राम की सौम्यता, शांति, स्थिरता, मुस्कान व अन्य सद्गुणों का विस्तार से बखान किया. जगतगुरु ने कहा माता सीता का निर्वासन नहीं हुआ है. लव-कुश का जन्म अयोध्या में ही हुआ है. जहां किसी का वध नहीं हुआ वह अवध है. गुरुदेव ने भक्ति भजन के माध्यम से भी बीच-बीच में श्रद्धालुओं को नाचने, थिरकने और तालियां बजाकर भक्ति भजन में लीन होने के लिए विवश करते रहे.
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