Sitamarhi : फर्जी सर्टिफिकेट पर बहाल शिक्षक भेजे गये जेल

Edited by DIGVIJAY SINGH
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शिक्षक ठाकुर ने अपनी बहाली फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर करा ली थी.

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— सीतामढ़ी में पकड़े जाने के भय से किशनगंज में करा ली थी बहाली — फिर विभाग की मदद से बन गया था गृह प्रखंड के स्कूल में शिक्षक Sitamarhi : सीतामढ़ी. जिले में अवैध शिक्षकों की बड़ी तादाद रही है. अब तक सौ से अधिक फर्जी व अवैध शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है. खास बात कि जिन शिक्षकों पर प्राथमिकी की कार्रवाई की गई है, ये शिक्षक हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पद से इस्तीफा नही दिए थे. इन्हीं शिक्षकों में एक है हित नारायण ठाकुर, जिन्हें एएसपी आशीष आनंद के निर्देश पर पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. अन्य शिक्षकों (फर्जी/अवैध) से अलग उक्त शिक्षक की कारस्तानी रही है. — बहाली अवैध, फिर भी निर्भीक होकर नौकरी मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी आशीष आनंद ने बारीकी से अनुसंधान करने के बाद पाया कि शिक्षक ठाकुर ने अपनी बहाली फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर करा ली थी. बारीकी से जांच करने पर एएसपी ने पाया कि श्री ठाकुर की बहाली अवैध थी. फिर भी वह निर्भीक होकर करीब 24 वर्षों तक नौकरी किया और वेतन उठाया. विभाग को भनक तक नहीं लगी कि ठाकुर की बहाली अवैध है. यह शातिर माइंड का रहा है. इस बात को उसने खुद साबित कर दिखाया है. अपनी कारस्तानी को छुपाने के लिए उसने पूरी कोशिश की, पर निगरानी डीएसपी की पैनी नजरों से नहीं बच सका. जांच में खुलासा हो गया कि उसकी अवैध थी. उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई और डीएसपी सदर- 2 आशीष आनंद के पर्यवेक्षण रिपोर्ट में आरोप सत्य पाए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. — सीतामढ़ी से किशनगंज फिर सुरसंड में नौकरी वह वर्ष 2008 में बथनाहा प्रखंड में मध्य विद्यालय, कोईली में प्रखंड शिक्षक के रूप में बहाल हुआ था. वर्ष- 12 में वह यहां शिक्षक के पद से इस्तीफा देकर 34540 कोटि के शिक्षक के तहत किशनगंज जिला के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पहाड़कट में नौकरी करने लगा. बाद के वर्षों में अंतर्रजिला स्थानांतरण के तहत वह गृह प्रखंड सुरसंड के मध्य विद्यालय, राधाउर में चला आया. तब से अबतक उसी स्कूल में कार्यरत था. हाइकोर्ट के आदेश पर नियोजित शिक्षकों की निगरानी जांच चल रही हैं. ठाकुर के शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र की जांच में डीएसपी को पता चला कि यह फर्जी है. दरअसल, ठाकुर के प्रमाण-पत्र असम राज्य के जिस संस्थान का नाम है, वहां के अधिकारी ने इसे फर्जी करार दिया था. संस्थान ने रिपोर्ट किया था कि ठाकुर का प्रमाण-पत्र उनके यहां से निर्गत ही नही है. उक्त शिक्षक सुरसंड प्रखंड के सहनियापट्टी गांव का रहने वाला है.

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