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कपड़ा सुखाने के काम आ रहा 50 लाख का सोलर लाइट

Updated at : 12 Jun 2024 9:19 PM (IST)
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कपड़ा सुखाने के काम आ रहा 50 लाख का सोलर लाइट

सदर अस्पताल में 50 लाख रुपये की कीमत से लगे सोलर लाइट की मशीन 10 वर्षों में एक दिन भी उपयोग में नहीं आ पाया.

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सीतामढ़ी. सदर अस्पताल में 50 लाख रुपये की कीमत से लगे सोलर लाइट की मशीन 10 वर्षों में एक दिन भी उपयोग में नहीं आ पाया. जिसके कारण 50 लाख के सोलर लाइट आज कपड़ा सुखाने के काम आता है. जिसके कारण आज भी हर महीने बिजली बिल के अलावे प्रत्येक दिन दो जेनरेटर का 8700 सौ रुपये भाड़ा लग रहा है, वहीं उपयोग करने पर हर घंटे 15 लीटर डीजल एक जेनरेटर में लगते हैं. आटसोर्सिग डीलिंग कर्मी प्रदीप कुमार ने बताया कि हर महीने करीब 5 लाख रुपये बिजली के लिए आउटसोर्सिग कंपनी को दी जाती है. बताया कि सोलर लाइट की सिस्टम पूरी तरह से खराब हो गयी है. वर्तमान समय में सोलर लाइट के लिए लगाये गये प्लेट के उपर अस्पताल के इमरजेंसी व जेनरल वार्ड के बेड पर बिछाने वाले बेड सीट को धुप में सुखाने का काम किया जा रहा है. बिजली की कमी को लेकर वर्ष 2014 में सदर अस्पताल में सोलर पॉवर प्लांट लगाया गया था. उस समय सोलर पॉवर प्लांट लगाने में सरकार को 50 लाख रुपये की खर्च आयी थी. जिसका उद्देश्य था कि हर दिन आटसोर्सिग के तहत जेनरेटर में खर्च होने वाले रुपये में कमी आ सके. करीब तीन महीने के अंदर सोलर पॉवर प्लांट को लगा दिया गया था. प्लांट लगाने आये कंपनी के कर्मीयो ने सोलर पॉवर प्लांट को कुछ देर के लिए चलाया भी था.

–ट्रायल के बाद एक दिन भी नहीं चला सोलर लाइट

ट्रायल दिखाने के बाद प्लांट लगाने वाली कंपनी सर्टिफ़िकेट लेकर चली गयी. लेकिन उसके बाद सोलर लाइट का उपयोग सदर अस्पताल में नहीं हो सका. शिकायत करने पर कई बार पटना से सोलर पॉवर प्लांट ठीक करने के लिए इंजीनियर भी आये. लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकल पाया. वर्ष 2022 में एक बार फिर इंजीनियर की एक टीम सोलर लाइट को ठीक करने आयी थी. लेकिन सोलर लाइट ठीक से काम नहीं कर सका. जानकारी के अनुसार सोलर लाइट में लगाये गये बैट्री या तो पूरी तरह से खराब होकर रद्दी हो गयी है या गायब हो गये हैं. स्वास्थ्य विभाग को वर्ष 2014 में 50 लाख रुपये लगाने के बाद भी सदर अस्पताल सीतामढ़ी में विधुत आपूर्ति को लेकर वर्ष 2014 से 24 तक 50 लाख से अधिक आटसोर्सिग संस्थान को भुगतान करनी पडी है. इसकी जानकारी नीचे से उपर तक के सभी स्वास्थ्य पदाधिकारी को है. लेकिन आजतक इस पर किसी की नजर नहीं पड पायी. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जानबूझकर शुरू से ही सोलर लाइट को खत्म करने की साजिश की गयी. जिसके कारण सोलर लाइट चलाने को लेकर गंभीरता पूर्वक पत्राचार नहीं की गयी. जिस कारण आज भी हर दिन 8700 के साथ डीजल की राशि स्वास्थ्य विभाग को आटसोर्सिग कंपनी को देना पड रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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