सीतामढ़ी में अचानक क्यों बढ़ी सर्पदंश के मरीजों की तादाद, पांच दिनों का आंकड़ा चौंका देगा

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सीतामढ़ी में सर्पदंश के मामले बढ़े, चौंकाने वाले आंकड़े

सीतामढ़ी में अचानक क्यों बढ़ी सर्पदंश के मरीजों की तादाद, पांच दिनों का आंकड़ा चौंका देगा

सीतामढ़ी जिले में बढ़ते तापमान और मानसून के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आई है। सदर अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। लेख में आंकड़ों के साथ-साथ सांपों के बाहर निकलने के कारणों और बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है।

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snake bite alert: सीतामढ़ी जिले में लगातार बढ़ रही गर्मी और मानसून की दस्तक के साथ ही सर्पदंश (सांप काटने) के मामलों में तेजी से वृद्धि होने लगी है. सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में सर्पदंश के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है.

आखिर क्यों बरसात और गर्मी में बाहर निकलते हैं सांप
आखिर क्यों बरसात और गर्मी में बाहर निकलते हैं सांप

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आंकड़ों में डराने लगी है सर्पदंश की घटनाएं

सदर अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से अब तक सर्पदंश के 40 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है. इनमें से 10 मरीजों को जहरीले सांपों ने काटा था. गनीमत यह रही कि सभी मरीजों को समय पर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ. वहीं, इससे पहले 15 जून से 30 जून 2026 के बीच सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में सर्पदंश के कुल 80 मरीज भर्ती हुए थे. इनमें से 16 लोगों को जहरीले सांप ने काटा था. इलाज के दौरान दो मरीजों की मौत हो गई थी, जबकि अन्य मरीजों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई.

आखिर क्यों बरसात और गर्मी में बाहर निकलते हैं सांप?

शिवगंगा हॉस्पिटल के संचालक डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों, खलिहानों, लकड़ी के ढेर, खेतों तथा झाड़ियों की ओर आ जाते हैं. दूसरी ओर, बारिश होने पर बिलों में पानी भर जाने के कारण भी सांप बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं. इस मौसम में धान की रोपनी, खेतों में काम, जलजमाव और रात के समय बिना रोशनी के आने-जाने से लोगों का सांपों से सामना अधिक होता है, जिससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ती हैं.

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डॉक्टर की सलाह: झाड़-फूंक से बचें, तुरंत पहुंचे अस्पताल

डॉ प्रमोद कुमार ने लोगों से अपील की है कि खेतों में काम करते समय लंबे जूते पहनें और रात में टॉर्च का उपयोग करें. घर के आसपास झाड़ियां और कचरा जमा न होने दें. सर्पदंश की स्थिति में किसी झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं. समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है. सदर अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे डॉक्टरों की टीम और एएसवी दवाएं उपलब्ध हैं.


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चंद्र मोहन झा

लेखक के बारे में

By चंद्र मोहन झा

चंद्रमोहन विगत 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे जिला और ब्लॉक स्तर पर क्राइम तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी संवेदनशील खबरों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के समसामयिक मुद्दों पर सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं.

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