सीतामढ़ी. नगर थाना अंतर्गत मेला रोड निवासी विश्वनाथ प्रसाद के दोनों पुत्र आकाश व आशीष के हत्या की साजिश जमीनी विवाद को लेकर संजीव डा अजय ने रचकर घटना को अंजाम दिया था. पुलिसिया दबिश के कारण न्यायालय में आत्मसमर्पण के बाद रिमांड पर पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपित संजीव ने यह खुलासा किया है. संजीव ने बताया है कि पांचवीं कक्षा के बाद वह पढ़ाई छोड़कर जमीन खरीद-बिक्री का काम करने लगा. वर्ष 2020 में रिश्ते में संजीव के चाचा विश्वनाथ प्रसाद के बड़े पुत्र विक्रम कुमार और उसकी मां ने रिंग बांध स्थित अपनी 11 डिसमिल बेचने के एवज में 15 लाख रुपया एडवांस लिया. 90 लाख में जमीन बिक्री तय हुआ था. एडवांस देने के बाद संजीव उस जमीन पर मिट्टी गिराने का काम करने लगा. फिर कुछ दिन बाद 15 लाख रुपया विश्वनाथ प्रसाद को देकर उस जमीन पर चहारदीवारी का काम कराने लगा तो अचानक से एक दिन आकार विश्वनाथ प्रसाद जमीन वापस मांगने लगा. कहा कि इस जमीन की अच्छी किमत डा अजय दे रहे है, तुम इस जमीन के बदले मेरा मेला रोड स्थित मेरा घर 70 लाख रुपया में ले लेना. घर की बात सोचकर मैं तैयार हो गया. लेकिन कुछ दिनन बाद घर रजिस्ट्री करने के लिए कहने पर विश्वनाथ प्रसाद जी इंकार कर गये. इसको लेकर उत्पन्न विवाद के कारण विश्वनाथ ने संजीव पर गोली चलवायी, जिससे संजीव बाल-बाल बचा. इसकी जानकारी होने पर संजीव ने पत्नी व पुत्री के साथ मिलकर विश्वनाथ की हत्या करने का मन बना लिया. इसी दौरान एक दिन डा अजय गुस्से में आकर संजीव से मिले और कहा कि रिंग बांध की जमीन के एवज में आपके चाचा विश्वनाथ प्रसाद रुपया लेकर फरार है. फिर विश्वनाथ प्रसाद के पुत्र आकाश व आशीष की हत्या करने के लिए घर का बाकी रुपया देने के नाम पर सीतामढ़ी बुलाया. फिर शाम में संजीव, उसकी पत्नी, पुत्री व दोस्त सूरज कुमार ने एक अप्रैल 2024 की शाम डा अजय कुमार से दोनों पुत्र की हत्या में सहयोग करने को कहा. तब डा अजय के तीन आदमी के साथ संजीव अपने परिवार के सदस्य व सूरज के साथ आकाश व आशीष के पास पहुंचकर हमला कर दिया. आकाश का गला दबा कर व आशीष को मारपीट कर अधमरा कर दिया. फिर हत्या की घटना को दुर्घटना दिखाने के लिए रूम में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को डिलिट कर दिया. फिर आकाश व आशीष को टाटा हैरियर गाड़ी में रखकर किरण चौक, मेहसौल चौक, शंकर चौक व कांटा चौक के रास्ते होते हुए काफी दूर जाकर फोर लेन पर पहुंचा. तब सूरज ने बताया की हमलोग दूसरे जिला आ गये है. तब पहले आकाश को उतार कर सड़क पर लिटा कर उसके शरीर पर गाड़ी का चक्का चढ़ा दिया. उसी प्रकार कुछ दुर जाकर आशीष को सड़क पर लिटा कर उसके शरीर पर गाड़ी का चक्का चढ़ा दिया. ताकि दुर्घटना लगे. घटना को अंजाम देने के बाद सबलोग सीतामढ़ी आ गये और सूरज और डा अजय के तीनों आदमी अपने-अपने घर चले गये. फिर अगले दिन 2 अप्रैल की सुबह संजीव अपने ससुराल नेपाल चला गया.यहां बता दे कि संजीव भवदेपुर के पूर्व मुखिया स्व काशी प्रसाद का पुत्र और मृतकों के पिता विश्वनाथ प्रसाद का भतीजा है.
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