16 वर्षों बाद पता चला दो शिक्षक थे अवैध बहाल

Updated at : 21 Sep 2024 10:30 PM (IST)
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16 वर्षों बाद पता चला दो शिक्षक थे अवैध बहाल

जिले में एक बार फिर दो अवैध शिक्षकों का पता चला है. उक्त दोनों करीब 16 वर्षों से फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर शिक्षक की नौकरी कर रहे है.

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सीतामढ़ी. जिले में एक बार फिर दो अवैध शिक्षकों का पता चला है. उक्त दोनों करीब 16 वर्षों से फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर शिक्षक की नौकरी कर रहे है. जांच में सब कुछ खुलासा हो गया है. जांच रिपोर्ट के आधार पर निगरानी विभाग के वरीय डीएसपी सह जांच पदाधिकारी कन्हैया लाल ने बथनाहा व बेलसंड थाना को उक्त दोनों अवैध बहाल शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया है. उक्त दोनों शिक्षकों के शिक्षक प्रशिक्षण के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए है. खास बात कि इन दोनों ने एक ही संस्थान (गुवाहाटी) के प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर नौकरी हासिल कर ली थी. उक्त संस्थान ने निगरानी डीएसपी को रिपोर्ट किया है कि इन दोनों के प्रमाण-पत्र उनके अधीन किसी भी संस्थान से निर्गत नही है. यानी जो प्रमाण पत्र नियोजन के दौरान दिए गए थे, वो फर्जी है. इन शिक्षकों में मवि, हरनहिया, जलसी के शिक्षक सुशील कुमार व प्राथमिक विद्यालय, भडवारी डोम टोला, चंदौली के सुबोध कुमार है. क्षमादान के तहत त्याग पत्र नहीं निगरानी डीएसपी के आवेदन के अनुसार, शिक्षक सुशील कुमार द्वारा छह मार्च 24 को त्याग पत्र दिया गया. हालांकि डीएसपी ने पुलिस को जानकारी दी है कि हाईकोर्ट के स्तर पारित आदेश के आलोक में क्षमादान के तहत त्याग पत्र नहीं दिया गया है. उक्त पूर्व शिक्षक सुशील कुमार रीगा प्रखंड के रेवासी गांव के स्व. चंदेश्वर ठाकुर का पुत्र है. इधर, सुबोध कुमार द्वारा भी क्षमादान के अंतर्गत पद से त्याग पत्र नही दिया गया है. वह महिंदवारा थाना क्षेत्र के नेउरी गांव के राधेश्याम ठाकुर का पुत्र है. दोनों का नियोजन वर्ष 2008 में हुआ था. यानी 16 वर्षों बाद अवैध बहाली का पता चला है.

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