भागलपुर का 75 साल पुराना बरारी रेलवे स्टेशन हुआ इतिहास, अब बनेगा म्यूजियम

मशीन से तोड़ा जा रहा बरारी स्थित पुराना रेलवे स्टेशन
Bhagalpur News{ भागलपुर का 75 साल पुराना बरारी रेलवे स्टेशन अब इतिहास बन चुका है. कभी यात्रियों से गुलजार रहने वाले इस स्टेशन का भवन गिरा दिया गया है. इसकी जगह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एक म्यूजियम का निर्माण करेगा, जो भागलपुर की ऐतिहासिक रेल विरासत को नई पहचान देगा.
भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट
Bhagalpur News: भागलपुर का एक ऐसा रेलवे स्टेशन, जहां कभी टिकट खिड़की पर यात्रियों की भीड़ लगती थी, छोटी लाइन की ट्रेनें सीटी बजाकर रवाना होती थीं और जहाज व रेल के जरिए लंबी यात्राएं पूरी होती थीं, अब इतिहास बन चुका है. करीब 75 वर्षों तक शहर की पहचान रहे बरारी रेलवे स्टेशन का भवन शनिवार से ध्वस्त किया जाने लगा. इसकी जगह अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से म्यूजियम बनाया जाएगा.
यह बदलाव केवल एक पुराने भवन के टूटने की कहानी नहीं, बल्कि भागलपुर की ऐतिहासिक रेल विरासत के नए अध्याय की शुरुआत भी है.
75 साल पुराने बरारी रेलवे स्टेशन का भवन तोड़ा जा रहा
भागलपुर के बरारी पुल घाट मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक बरारी रेलवे स्टेशन का बंद पड़ा भवन शनिवार से मशीनों की मदद से ध्वस्त किया जाने लगा. वर्ष 1951 में बने इस स्टेशन ने दशकों तक भागलपुर की परिवहन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लंबे समय से यहां रेल परिचालन बंद था, लेकिन भवन और रेलवे क्वार्टर अब भी उस दौर की याद दिलाते थे.
अब इस स्थान पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से म्यूजियम का निर्माण कराया जाएगा. इसके साथ ही शहर की एक ऐतिहासिक पहचान नए स्वरूप में सामने आएगी.
कभी यहां से कटता था टिकट, छोटी लाइन की ट्रेन से सफर करते थे लोग
करीब 35 वर्ष पहले तक बरारी रेलवे स्टेशन यात्रियों से गुलजार रहता था. यहां से छोटी लाइन की ट्रेनें चलती थीं और यात्री टिकट लेकर कचहरी स्टेशन होते हुए भागलपुर रेलवे स्टेशन तक सफर करते थे.
उस समय स्टेशन परिसर में टिकट काउंटर, स्टेशन मास्टर का कार्यालय और जीआरपी थाना भी संचालित होता था. रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों के रहने के लिए आसपास रेलवे क्वार्टर बनाए गए थे, जिनमें से कई आज भी मौजूद हैं. हालांकि ट्रेनों का परिचालन बंद होने के बाद स्टेशन धीरे-धीरे वीरान हो गया.
Bhagalpur News: जब जहाज और ट्रेन मिलकर पूरी करते थे सफर
बरारी रेलवे स्टेशन केवल रेल सेवा तक सीमित नहीं था. इसका संबंध उस दौर की जल-रेल परिवहन व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ था.
उस समय यात्री बरारी जहाज घाट से रेलवे के स्टीमर पर सवार होकर महादेवपुर घाट पहुंचते थे. वहां से छोटी लाइन की ट्रेन पकड़कर थाना बिहपुर और आगे विभिन्न इलाकों की यात्रा करते थे. वापसी में भी यही व्यवस्था अपनाई जाती थी.
आज की पीढ़ी के लिए यह व्यवस्था शायद किसी कहानी जैसी लगे, लेकिन एक समय यही भागलपुर और आसपास के इलाकों की जीवनरेखा थी.
स्थानीय लोगों की यादों से जुड़ा था यह स्टेशन
बरारी रेलवे स्टेशन सिर्फ ईंट और पत्थरों का ढांचा नहीं था. यह हजारों लोगों की स्मृतियों का हिस्सा था. कई बुजुर्ग आज भी यहां से की गई अपनी पहली रेल यात्रा, टिकट खिड़की की कतार और छोटी लाइन की ट्रेन की आवाज को याद करते हैं.
स्टेशन बंद होने के बाद भी इसका भवन लोगों को पुराने भागलपुर की याद दिलाता रहा. अब भवन टूटने के साथ शहर के रेल इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी समाप्त हो गया.
म्यूजियम बनने से क्या बदलेगा
स्टेशन की जगह बनने वाला म्यूजियम केवल एक नया निर्माण नहीं होगा, बल्कि यह भागलपुर की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान देने का प्रयास माना जा रहा है.
यदि म्यूजियम में बरारी रेलवे स्टेशन, छोटी लाइन की रेल सेवा, जहाज घाट और जल-रेल परिवहन से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और ऐतिहासिक सामग्री को स्थान मिलता है, तो आने वाली पीढ़ियां भागलपुर के गौरवशाली परिवहन इतिहास को करीब से जान सकेंगी.
इससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है और शहर की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने में मदद मिलेगी.
Bhagalpur News: लोगों की नजर अब म्यूजियम परियोजना पर
भवन ध्वस्त होने का काम शुरू हो चुका है. अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि म्यूजियम का निर्माण कितनी तेजी से पूरा होता है और उसमें भागलपुर की रेल विरासत को किस तरह सहेजा जाता है.
लोगों की उम्मीद है कि यह परियोजना केवल नया भवन बनाकर सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बरारी रेलवे स्टेशन के इतिहास को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि कभी यही स्टेशन भागलपुर की पहचान हुआ करता था.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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