Sitamarhi : कड़ाके की ठंड के कारण जनजीवन के साथ-साथ पशु-पक्षी भी प्रभावित

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Sitamarhi : कड़ाके की ठंड के कारण जनजीवन के साथ-साथ पशु-पक्षी भी प्रभावित

अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार की शाम से अचानक ठंड बढ़ गई. शुक्रवार व शनिवार को पूरे दिन सूर्य देव दर्शन नहीं दिये.

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पुपरी.

अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार की शाम से अचानक ठंड बढ़ गई. शुक्रवार व शनिवार को पूरे दिन सूर्य देव दर्शन नहीं दिये. पछिया हवा के कारण पूरे दिन ठंड, कुहासा व शीतलहर जारी रहा. मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह तक ठंड में कोई कमी आने की संभावना नहीं है. शुक्रवार व शनिवार को तापमान अधिकतम 28 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस मापा गया. कृषि विज्ञान केंद्र बलहा मकसूदन सीतामढ़ी के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ किंकर कुमार मौसम विशेषज्ञ राकेश कुमार ने बताया कि अगले सप्ताह तक जिले में ठंड के प्रकोप की संभावना है. उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड के कारण जनजीवन के साथ- साथ पशु- पक्षी भी प्रभावित होगा. यह मौसम दूध उत्पादन के लिए काफी अच्छा होता है. लेकिन पशुपालक को जाड़े के मौसम में पशु प्रबंधन की जानकारी नही होने के कारण नुकसान हो सकता है. ऐसे में पशुपालक कुछ उपाय अपनाकर अच्छे दूध उत्पादन के साथ ही पशुओं को ठंड से बचा सकते है. डॉ कुमार ने बताया कि ठंड से पशुओं के बचाव के लिए रात के समय पशुओं को घर के अंदर बांध के रखें. पशुशाला के दरवाजे व खिड़कियों को जुट के बोरे से ढककर रखें साथ ही पशुशाला में गोबर, मूत्र की निकासी करें. जिससे जल जमाव न हो सके एवं नमी भी दूर हो जाये. पशुओं को ताजा या गुनगुना पानी ही पिलायें तथा शाम होते ही पशुओं से थोड़ी दूर पर अलाव की व्यवस्था करें. ताकि पशुशाला में गर्मी बनी रहें. दुधारू पशुओं को तेल एवं गुड़ देने से भी शरीर का तापमान समान बनाए रखने में सहायता मिलती है. ऐसे समय में पशुओं को बाहर चरने के लिए न जाने दें. डॉ किंकर कुमार ने बताया कि दुधारू पशुओं के उत्पादन बनाए रखने के लिए पशुओं को एक किलोग्राम अतिरिक्त दाना का मिश्रण दें, जिससे कि पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा मिल सके. साथ ही खनिज लवण कॉन्सिमिन या मिनफागोल्ड प्रति पशु 50 ग्राम दें. ठंड में पशुओं को खुरपका मुंहपका रोग होने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में पशुपालक पशुओं में टीका लगवाएं. जाड़े में पशुओ के थनों में दरार परने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में उसके बचाव के लिए दुधारू पशुओं को दुहने के बाद वेसलीन का प्रयोग करें.

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फणींद्र कुमार झा

लेखक के बारे में

By फणींद्र कुमार झा

फणींद्र विगत 16 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें समस्यात्मक, प्रशासनिक एवं जमीनी स्तर की प्रखंड से जुड़ी खबरों को बारीकी से तराशने का गहरा अनुभव प्राप्त है. वे स्थानीय मुद्दों को निष्पक्षता से उठाने के लिए जाने जाते हैं.

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