गैस सिलेंडर 29 रुपये महंगा, इन 7 देशों से अब भी सस्ता है भारत में एलपीजी

Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 07 Jun 2026 12:16 PM

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LPG Price in India vs Other Countries (Photo: ANI)

LPG Price in India vs Other Countries: देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 29 रुपये बढ़ गए हैं. जानिए पाकिस्तान, नेपाल और अमेरिका से कितनी सस्ती है भारत में कुकिंग गैस.

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LPG Price in India vs Other Countries: देश में घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं. सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये का इजाफा किया है. इस फैसले के बाद दिल्ली में सिलेंडर का दाम 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गया है. पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है, इससे पहले 7 मार्च को भी कीमतें 60 रुपये बढ़ाई गई थीं. हालांकि, इस महंगाई के बीच सरकार ने आंकड़ों के जरिए साफ किया है कि भारत में कुकिंग गैस की कीमतें अब भी दुनिया के कई देशों के मुकाबले काफी कम हैं. आइए जानतें हैं कि दूसरे देशों के मुकाबले भारत में कितनी सस्ती है गैस. 

दूसरे देशों के मुकाबले भारत में कितनी सस्ती है गैस?

इंटरनेशनल लेवल पर तुलना करें तो भारत में एलपीजी के दाम कई पड़ोसी मुल्कों और विकसित देशों से बहुत कम हैं. सरकार के मुताबिक, जहां भारत में एक सामान्य कंज्यूमर को सिलेंडर 942 रुपये का पड़ता है, वहीं दुनिया के बाकी देशों में इसके लिए भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ रही है:

  • पाकिस्तान: यहां एक सिलेंडर के लिए 1,046 रुपये देने पड़ रहे हैं. 
  • नेपाल और बांग्लादेश: नेपाल में कीमत 1,207 रुपये और बांग्लादेश में लगभग 1,225 रुपये है. 
  • श्रीलंका: यहां जनता को एक सिलेंडर 1,241 रुपये में मिल रहा है. 
  • अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका में इसकी कीमत करीब 1,755 रुपये और ऑस्ट्रेलिया में 1,765 रुपये है. 
  • कनाडा: यहां गैस सबसे ज्यादा महंगी है, जहां लोगों को एक सिलेंडर के लिए 2,411 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. 

अचानक क्यों बढ़ाने पड़े सिलेंडर के दाम?

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज समुद्री मार्ग पर आई दिक्कतों की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में गैस की लागत बहुत बढ़ गई है. भारत अपना अधिकांश एलपीजी इंपोर्ट इसी रूट से करता है. ग्लोबल लेवल पर कीमतों को तय करने वाला सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) बेंचमार्क सिर्फ चार महीनों में करीब 46% उछल गया है. फरवरी 2026 में जो गैस 542.5 डॉलर प्रति टन थी, वह जून 2026 में बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन हो चुकी है. 

कंपनियों को कितना घाटा और क्या है सरकार का प्लान?

होटल और बिजनेस में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम तो हर महीने इंटरनेशनल मार्केट के हिसाब से अपने आप बदल जाते हैं, लेकिन घरेलू सिलेंडर के रेट सरकार काबू में रखती है. आज की तारीख में एक घरेलू सिलेंडर को जनता तक पहुंचाने की असली लागत 1,600 रुपये से ऊपर आ रही है. इसके मुकाबले आम जनता से 942 रुपये और उज्ज्वला ग्राहकों से 642 रुपये लिए जा रहे हैं. यानी सरकार और तेल कंपनियां हर सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा (Under-recovery) खुद सह रही हैं. कंपनियों का यह कुल घाटा 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसकी भरपाई के लिए सरकार ने कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर किया है. हालांकि, अच्छी बात यह है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और घरेलू प्रोडक्शन को भी 32 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर 52 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है. 

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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