नोटबंदी के बाद महंगाई ने पकड़ी रफ्तार

Published at :28 Nov 2016 4:36 AM (IST)
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नोटबंदी के बाद महंगाई ने पकड़ी रफ्तार

परेशानी. परिवहन व्यवस्था ठप रहने से जीवनोपयोगी सामग्री की आपूर्ति प्रभावित, कीमत पर पड़ा असर जरूरी वस्तुओं की बढ़ी िकल्लत सीतामढ़ी : नोटबंदी के बाद अब इलाके में इसका साइड इफेक्ट महंगाई के रूप में सामने आने लगा है. नोटबंदी के चलते जहां एक ओर ट्रांसपोर्ट सेवाओं के प्रभावित होने से दैनिक जीवनोपयोगी सामग्री की […]

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परेशानी. परिवहन व्यवस्था ठप रहने से जीवनोपयोगी सामग्री की आपूर्ति प्रभावित, कीमत पर पड़ा असर

जरूरी वस्तुओं की बढ़ी िकल्लत
सीतामढ़ी : नोटबंदी के बाद अब इलाके में इसका साइड इफेक्ट महंगाई के रूप में सामने आने लगा है. नोटबंदी के चलते जहां एक ओर ट्रांसपोर्ट सेवाओं के प्रभावित होने से दैनिक जीवनोपयोगी सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है, वहीं इसके चलते आवश्यक वस्तुओं की किल्लत भी होने लगी है और इसका प्रभाव कीमत पर पड़ने लगा है. हालत यह है कि सरसों तेल, रिफाइन, चीनी, आटा, मैदा व आलू -प्याज की कीमत में जबरदस्त उछाल आयी है. नोटबंदी के बाद आटा व मैदा की कीमत में जबरदस्त वृद्धि हुई है.
नोटबंदी से पूर्व 23 से 24 रुपये प्रति किलो बिकने वाला आटा व मैदा की कीमत अब 28 रुपये प्रति किलो हो गई है. जबकि 41 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी की कीमत 44 रुपये प्रति किलो हो गई है. रिफाइन की कीमत में 16 फीसद वृद्धि हुई है. नोटबंदी से पूर्व 84 रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाली रिफाइन की कीमत बढ़ कर अब 100 रुपये तक पहुंच गई है. 100 से 104 रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाली सरसों तेल की कीमत बढ़ कर 106 से 110 रुपये हो गई है. 16 से 18 रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाले आलू की कीमत अब 20 रुपये तक पहुंच गई है. 12 रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाली प्याज की कीमत अब 16 से 18 रुपये हो गई है.
इसी तरह विभिन्न प्रकार के दाल, चना, लाल मिर्चा, लहसून, घी व चावल समेत अन्य खाद्य सामग्री की कीमत में भी एक से दो रुपये की वृद्धि हुई है. मुख्यालय डुमरा के खुदरा किराना व्यवसायी गौरी शंकर के अनुसार नोटबंदी के बाद ट्रांसपोर्ट सेवाएं ठप हैं. इसके चलते ट्रकों का परिचालन प्रभावित हो रहा है. नतीजतन उपभोक्ता सामग्री की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. आपूर्ति कम होने के कारण थोक व्यापारियों द्वारा मांग के अनुसार सामग्री की कीमत बढ़ा दी गई है. लिहाजा खुदरा विक्रेताओं को महंगी दर पर सामग्री की खरीदारी करनी पड़ रही है. इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है.
सब्जी की कीमत में गिरावट का दौर जारी
बेशक नोटबंदी के बाद स्थितियों में बदलाव आया है. उपभोक्ता सामग्री की कीमत में इजाफा हुआ है, लेकिन
सब्जी की कीमत में लगातार गिरावट जारी है. नोटबंदी के बाद सब्जी की कीमत में 40 से 65 फीसद की गिरावट आई है, वहीं कीमत में गिरावट का दौर जारी है. वर्तमान में फुल गोभी की कीमत 14 रुपये प्रति किलो, बंधा गोभी की कीमत 20 रुपये, टमाटर की कीमत 30 रुपये प्रति किलो, सेम की कीमत 28 रुपये प्रति किलो, बैगन 10 रुपये प्रति किलो व पालक 20 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है. सब्जी दुकानदारों की मानें तो अब पहले की तरह सब्जियां बिक नहीं रहीं हैं. लिहाजा सब्जियों
को सड़ने से बचाने के लिए दुकानदार इसे औने-पौने के दाम में बेचने को मजबूर हैं. दुकानदारों के अनुसार सब्जी का व्यवसाय इन दिनों घाटे का सौदा बन गया है.
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