अधिकतर दुष्कर्म पीड़िता को नहीं मिलता न्याय!

Published at :27 Nov 2016 12:11 AM (IST)
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अधिकतर दुष्कर्म पीड़िता को नहीं मिलता न्याय!

मायूसी. पंचायत में मामला जाने के बाद नहीं मिलती राहत सीतामढ़ी : पंचायत के चक्कर में फंसने व दबाव के कारण अधिकतर दुष्कर्म पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाता. कारण है कि दुष्कर्म के बाद पंच परमेश्वर के शरण में जाने के बाद अधिकतर मामलों में आर्थिक जुर्माना के बाद सुलह करने का फैसला सामने […]

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मायूसी. पंचायत में मामला जाने के बाद नहीं मिलती राहत

सीतामढ़ी : पंचायत के चक्कर में फंसने व दबाव के कारण अधिकतर दुष्कर्म पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाता. कारण है कि दुष्कर्म के बाद पंच परमेश्वर के शरण में जाने के बाद अधिकतर मामलों में आर्थिक जुर्माना के बाद सुलह करने का फैसला सामने आता है. कुछ मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर रहने के कारण पीड़ित परिवार मजबूर हो जाता है, तो कुछ मामलों में दबाव बना कर भी सुलह करने का फरमान जारी होता है.
शिकायत दर्ज होने के बाद मेडिकल जांच
कुछ मामले ऐसे भी सामने आये हैं, जिनमें कुछ संवेदनहीन थानाध्यक्ष पीड़ित परिवार का शिकायत दर्ज करने में काफी विलंब करते हैं.
शिकायत दर्ज होते-होते काफी वक्त बीत जाता है. इस कारण मेडिकल रिपोर्ट पीड़िता के पक्ष में नहीं आ पाता. कुछ मामले ऐसे भी सामने आते हैं, जिनमें लड़की के अपहरण का आरोप लगाते हुए नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी जाती है. पुलिस जब दोनों को पकड़ कर न्यायालय में पेश करती है, तो मामला प्रेम-प्रसंग का सामने आता है.
24 से 36 घंटे में स्थिति स्पष्ट
महिला चिकित्सक संगीता झा का कहना है कि दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल जांच कई बातों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है. हालांकि 24 से 36 घंटे के अंदर मेडिकल जांच करने पर स्थिति स्पष्ट हो जाती है.
पुलिस को शिकायत करने में हो जाता है विलंब
मेडिकल जांच में स्थिति नहीं हो पाती स्पष्ट
मेडिकल टेस्ट 225, सत्य पाये गये 35
सदर अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2015 से अक्तूबर 2016 तक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद 225 लड़कियों व महिलाओं को मेडिकल टेस्ट के लिए लाया गया. जिसमें मात्र 35 लड़कियों व महिलाओं के साथ दुष्कर्म की सत्यता मेडिकल टेस्ट में सामने आयी. इसका कारण सामने आया है
कि दुष्कर्म के बाद तीन-चार दिनों तक पीड़ित परिवार पंचायत से न्याय मिलने के भरोसा पर पुलिस के पास नहीं जाती. जब न्याय नहीं मिलता, तब पुलिस के पास शिकायत करने पहुंचते है, तब तक विलंब हो चुका होता है. चिकित्सकों का मानना है कि दुष्कर्म के 24 से 36 घंटा के अंदर मेडिकल टेस्ट में स्पष्ट हो जाता है कि पीड़िता दुष्कर्म की शिकार हुई है या नहीं. इसके अलावा लोक-लाज के भय से भी पीड़ित परिवार पंचायत में शिकायत कर न्याय की चाह रखते है.
बिना देर किये पुलिस के पास पहुंचें पीड़िता
दुष्कर्म के अधिकतर मामले पंचायत के फैसले से असंतुष्ट होने के बाद पुलिस के पास आते हैं. तब तक तीन-चार दिन का वक्त गुजर जाता है. जिस कारण मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि स्पष्ट तौर पर नहीं हो पाती है. इस कारण पुलिस चाह कर भी पीड़िता को संतोषजनक न्याय नहीं दे पाती है. हत्या व दुष्कर्म समेत अन्य संगीन मामलों को लेकर किसी भी व्यक्ति को बगैर विलंब किये पुलिस के पास आना चाहिए.
राजीव रंजन, एएसपी
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