पूछ रही केशव की मां, क्या था बेटे का कसूर

सीतामढ़ी/मेजरगंज : आखिर मेरा बेटा का क्या कसूर था? उसने बिगड़ चुके बच्चे को सही राह पकड़ाने की कोशिश ही तो की थी. क्या कोई शिक्षक बच्चे को डांट फटकार भी नहीं सकता है? यह उस मां का दर्द है जिसने अपनी आंख के सामने जवान बेटे को तड़प-तड़प कर मरते हुए देखा है. आततियों […]
सीतामढ़ी/मेजरगंज : आखिर मेरा बेटा का क्या कसूर था? उसने बिगड़ चुके बच्चे को सही राह पकड़ाने की कोशिश ही तो की थी. क्या कोई शिक्षक बच्चे को डांट फटकार भी नहीं सकता है? यह उस मां का दर्द है जिसने अपनी आंख के सामने जवान बेटे को तड़प-तड़प कर मरते हुए देखा है. आततियों के शिकार हुए केशव की मां पवितर देवी यह कहते हुए बिलखने लगी कि उसका तो जिंदगी का सहारा ही छीन गया.
मेजरगंज बाजार स्थित शांति निकेतन कोचिंग सेंटर के शिक्षक केशव कुमार पिछले एक नवंबर से ही दबंगों के निशाने पर था. बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर अपनी सख्त शैक्षणिक अनुशासन शैली के लिए पहचाने जानेवाला केशव का यह अंदाज ही उसकी जान का दुश्मन बन गया. बच्चे को बेहतर अनुशासन की सीख उस नासमझ अभिभावक को इतना नागवार गुजरा कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिल कर जिंदा जलाने के उद्देश्य से केशव के शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आग के हवाले कर दिया.
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