मुन्ना जल्दी उठो, कतार में लगना है

Published at :11 Nov 2016 1:56 AM (IST)
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मुन्ना जल्दी उठो, कतार में लगना है

सीतामढ़ी : जी का जंजाल बना 500 और 1000 के नोट को बदलने के लिए गुरुवार को सुबह से हीं घरों में अफरातफरी कायम रही. हर कोई भीड़ की आशंका को भांपते हुए बैंक की शाखाओं में कतार में लग पहले कैश प्राप्त करना चाहता था. अफरातफरी के बीच दूसरे दिन भी प्रभात खबर टीम […]

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सीतामढ़ी : जी का जंजाल बना 500 और 1000 के नोट को बदलने के लिए गुरुवार को सुबह से हीं घरों में अफरातफरी कायम रही. हर कोई भीड़ की आशंका को भांपते हुए बैंक की शाखाओं

में कतार में लग पहले कैश प्राप्त करना चाहता था. अफरातफरी के बीच दूसरे दिन भी प्रभात खबर टीम ने शहर के विभिन्न मुहल्लों का दौरा किया, जहां नोट को लेकर आम लोगों की परेशानी का पता चला.
कोट बाजार वार्ड संख्या-16 में सावित्री देवी सुबह के छह बजे पुत्र को उठाते हुए कहती है कि मुन्ना जल्दी उठो, कतार में लगना है, बैंक में भीड़ हो जायेगी. हालात शहर के बैंकर्स कॉलोनी, खेमका कॉलोनी, जवाहर चौक, प्रतापनगर, आदर्शनगर, राजोपट्टी, जानकी स्थान, मिरचाईपट्टी, कपरौल रोड, पुरानी एक्सचेंज रोड आदि मुहल्लों में भी एक जैसी थी. बिना ब्रश किये और खाये पीये लोग बैंक की शाखाओं में कतार लग चुके थे, इनमें महिलाओं की संख्या में भी कम नहीं थी.
बुर्जुगों को भी आम लोगों के साथ लाइन में लगना पड़ा. चेहरे पर कोई सिकन नहीं, मकसद एक कि कैश लेकर हीं लौटना है. सुबह 10 बजते-बजते लाइन लंबी हो चुकी थी. बैंकों के कैश काउंटर खुलने के साथ दोपहर तीन बजे तक भीड़ सामान्य नहीं हो पायी थी.
खुदरा को लेकर टेंपो चालक से नोक-झोंक
बैग में 15 सौ रुपये रहने के बाद भी बैरगनिया की ममता देवी को मेहसौल चौक पर एक टेंपो चालक से जलालत झेलनी पड़ी. यहां खुदरा का प्रोब्लम था और टेंपो चालक को महज आठ रूपये हीं चाहिए थे. ममता के पास पांच सौ रुपये के तीन नोट बचे थे. करीब 10 मिनट तक टेंपो चालक से उसकी नोक-झोंक होती रही. बाद में उसके पहचान के व्यक्ति ने सामने आकर चालक को भाड़ा का भुगतान किया
जिसके बाद मामले का पटाक्षेप हुआ. ममता ने बताया कि वह पुत्री का इलाज कराने डुमरा आयी थी और उसके पास पांच सौ के तीन नोट के अलावा कुछ नहीं बचा था. बैग में रखे 30 रुपये सुबह हीं खत्म हो चुके थे.
बाजार में नहीं दिखी रौनक
दूसरे दिन भी शहर का बाजार कैश क्राइसिस झेल रहा है. बड़े-बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान तो खुले हैं, लेकिन ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित है. मध्यम व्यवसाय करनेवालों की स्थिति भी एक समान है. खुदरा के लिए लोग भटक रहे हैं. बड़े प्रतिष्ठानों से 500 के बदले 100 रुपये के नोट मांगे जा रहे हैं. किसी को इलाज के लिए पैसे चाहिए तो किसी को दवा खरीदनी है.
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