भागवत कथा के श्रवण से दूर होती है सभी प्रकार की व्यथा

Published at :10 Oct 2016 5:00 AM (IST)
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भागवत कथा के श्रवण से दूर होती है सभी प्रकार की व्यथा

सीतामढ़ी : कन्हौली बाजार पर चल रहे भागवत कथा का समापन हो गया. अंतिम दिन अयोध्या से आये कथावाचक राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा सुनने से सब की व सभी तरह की व्यथा दूर होती है. भागवत में लोक कल्याण, समाज, राष्ट्र, प्रकृति, परलोक व परमात्मा जैसे विविध विषयों का विस्तार पूर्वक विवेचना […]

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सीतामढ़ी : कन्हौली बाजार पर चल रहे भागवत कथा का समापन हो गया. अंतिम दिन अयोध्या से आये कथावाचक राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा सुनने से सब की व सभी तरह की व्यथा दूर होती है. भागवत में लोक कल्याण, समाज, राष्ट्र, प्रकृति, परलोक व परमात्मा जैसे विविध विषयों का विस्तार पूर्वक विवेचना किया गया है.

नित्य नयी व्यवस्थाओं में रहना परिस्थिति है, किंतु अपने मन की परिस्थितियों का गुलाम न बनाते हुये सोंच व चिंतन को स्वस्थ बनाने में कथा सहायता करती है. कहा, श्री कृष्ण ने जन्म के तुरंत बाद कंस का वध नहीं करते हैं, बल्कि उसे सुधरने का मौका देते हैं. उंगली में नाखुन बढ़ने पर नाखुन काटा जाता है, अंगुली नहीं.

इसी तरह संबंधों में दरार पड़ने पर दरार पाटा जाता है, संबंधों को तोड़ा नहीं जाता. कथा स्थल पर मौजूद जिप अध्यक्ष उमा देवी ने बताया कि कलशस्थापन के दिन से ही कथावाचन चल रहा है. शाम में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है. इस कार्यक्रम के सफल संचालन में स्थानीय लोगों व ग्रामीण श्रद्धालुओं का भरपूर सहयोग रहा. मौके पर मुख्य यजमान चंद्रकांत प्रसाद, समाजसेवी सूर्यकांत प्रसाद व पंकज कुमार समेत अन्य मौजूद थे.

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