हिंदी के विकास में लेखकों की भूमिका

Published at :15 Sep 2016 5:45 AM (IST)
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हिंदी के विकास में लेखकों की भूमिका

सीतामढ़ी : भारती पब्लिक स्कूल, डुमरा के तत्वावधान में बुधवार को हिंदी दिवस गया. इस अवसर पर स्कूल के निदेशक बीके मिश्रा की अध्यक्षता में ‘हिंदी के वर्तमान दशा-दिशा’ विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के प्रारंभ में स्कूली बच्चों ने निदेशक व प्राचार्य को पुष्प गुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया. श्री मिश्रा ने […]

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सीतामढ़ी : भारती पब्लिक स्कूल, डुमरा के तत्वावधान में बुधवार को हिंदी दिवस गया. इस अवसर पर स्कूल के निदेशक बीके मिश्रा की अध्यक्षता में ‘हिंदी के वर्तमान दशा-दिशा’ विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के प्रारंभ में स्कूली बच्चों ने निदेशक व प्राचार्य को पुष्प गुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया. श्री मिश्रा ने कहा कि हिंदी के विकास में शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, लेखकों, अनुवादकों एवं समालोचकों की अहम भूमिका रही.

विदेशी विद्वानों के हिंदी के प्रति प्रेम के अनेक उदाहरण है, जिनमें फादर कालिम बुल्के की ‘रामकथा’ हिंदी प्रेम की पराकाष्ठा है. प्राचार्य नवीन कुमार झा ने हिंदी की विशिष्टता रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा किसी राष्ट्र की सभ्यता एवं संस्कृति की परिचायक एवं रीढ़ होती है. उन्होंने रामवृक्ष बेनीपुरी, रामधारी सिंह दिनकर,

जानकी बल्लभ शास्त्री एवं फणीश्वर नाथ रेणु की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला. शिशिर कुमार झा ने इसके समृद्धि के लिए इसे सच्चे अर्थों में सरकारी कामकाज की भाषा बनाने की प्रतिबद्धता जतायी. व्याख्यानमाला में शिक्षक सुधीर कुमार, शिक्षिका पूनम कुमारी, सचिव राजीव रंजन वर्मा ने भी अपने विचार रखे. मौके पर एसएन झा, एएन झा, एसबी ठाकुर, मृत्युंजय कुमार, पंकज कुमार, पवन कुमार समेत कई लोग उपस्थित थे.

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