ऑपरेशन के बाद अस्पताल से बच्चा को कर दिया गायब!

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Jan 2016 7:08 AM

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सीतामढ़ी : नगर के मोहनपुर चौक स्थित बुद्धा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर नामक एक निजी अस्पताल में बुधवार को प्रसव के बाद एक बच्चा गायब हो गया. परिजनों ने डॉक्टरों पर बच्चा गायब करने का आरोप लगा कर जमकर हंंगामा किया. सूचना पर नगर थानाध्यक्ष विशाल आनंद दल-बल के साथ मौके पर पहुंच कर लोगों […]

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सीतामढ़ी : नगर के मोहनपुर चौक स्थित बुद्धा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर नामक एक निजी अस्पताल में बुधवार को प्रसव के बाद एक बच्चा गायब हो गया. परिजनों ने डॉक्टरों पर बच्चा गायब करने का आरोप लगा कर जमकर हंंगामा किया. सूचना पर नगर थानाध्यक्ष विशाल आनंद दल-बल के साथ मौके पर पहुंच कर लोगों को शांत कराया. परिजन ऑपरेशन करनेवाले डॉ अरुण कुमार सिंह को बुलाने की मांग कर रहे थे. काफी देर बाद आये चिकित्सक व अस्पताल संचालक विनय कुमार को आक्रोशित परिजनों ने घेर कर बंधक बना लिया था.

खास बात यह थी कि संचालक विनय कुमार व चिकित्सक डॉ एके सिंह दोनों आमने-सामने थे. परिजनों की पूछताछ में डॉक्टर बता रहे थे कि ऑपरेशन डॉ एके श्रीवास्तव ने किया है, जबकि संचालक व परिजन बता रहे थे कि ऑपरेशन डॉ अरुण कुमार सिंह ने किया है. इसी बात पर आक्रोशित परिजनों ने डॉ सिंह को बंधक बना लिया व खरी-खोटीशेष पेज 15 पर
ऑपरेशन के बाद
सुनायी. आक्रोश देख डॉ सिंह वहां से निकल गये, लेकिन संचालक को बंधक बनाकर रखा गया.
कन्हौली थाना क्षेत्र के मरपा गांव निवासी पीड़िता जुबैदा खातून की सास व ससुर आस मोहम्मद ने पुलिस को बताया कि उसकी 20 वर्षीय पतोहू 9 माह 18 दिन की गर्भवती थी. पेट में दर्द के बाद गांव के चिकित्सक से दिखाया. उसकी सलाह पर वह मुन्नी खातून नामक आशा कार्यकर्ता के पास इलाज के लिए ला रही थी, लेकिन पहचान की ही हसीना खातून नामक आशा कार्यकर्ता उसे मिल गयी और प्रलोभन देकर उक्त हॉस्पिटल में रविवार को भरती करा दिया. मौके पर मौजूद डॉ अरुण कुमार सिंह ने पूछा कि अल्ट्रासाउंड हुआ है या नहीं. जवाब में कहा गया कि कभी भी अल्ट्रासाउंड नहीं कराया गया है. आशा कार्यकर्ता ने कहा कि जांच में साढ़े आठ सौ रुपये लगेगा. अल्ट्रासाउंड के बाद ऑपरेशन करना पड़ेगा. उसने कहा कि जो अच्छा होगा वही कीजिए.
इसके बाद डॉक्टर ने अस्पताल में ही किसी मशीन से जांच की और पीड़िता की सास से बताया कि बच्चा काफी छोटा है. दबा हुआ है. बड़ा ऑपरेशन करना पड़ेगा. उससे दवा लाने के लिए कहा गया. वह दवा लाने चली गयी. इसी बीच उसकी पतोह को ऑपरेशन रूम में ले जाया गया. ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने बताया कि इसके पेट में बच्चा नहीं है. पानी भरा हुआ था. इसपर उसने चिकित्सक से कहा कि नौ माह से गर्भवती है. बहू के पेट में बच्चा चल रहा था. ऐसा कैसे हो सकता है. यदि कोई रोग है, तो रोग कहां गया. इतने दिनों से उसे कोई तकलीफ क्यों नहीं हुई. यदि ट्यूमर था, तो दिखाइए. चिकित्सक ने कहा कि हल्ला मत करिए. इससे आपकी और हमारी दोनों की बदनामी होगी.
महिला ने मुखिया से मांगी मदद
महिला ने बुधवार को अपने पंचायत के मुखिया हबीबुल रहमान को इस बात की सूचना दी और मदद मांगा. उसके बाद मामला तूल पकड़ लिया. अस्पताल में जम कर हंगामा हुआ. बाद में मेहसौल पूर्वी पंचायत के मुखिया पति व रालोसपा के प्रदेश महासचिव आरिफ हुसैन व मेहसौल गोट के मुखिया पति रफीक अंसारी मौके पहुंच कर मामले को शांत कराया. थानाध्यक्ष विशाल आनंद ने बताया कि पीड़ित परिवार को आवेदन देने के लिए कहा गया है. आवेदन आने के बाद जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. बताया जाता है कि डॉ एके सिंह रीगा प्रखंड के पीएचसी में चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर तैनात है.
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