पगडंडी के सहारे रेंगती है वेलवा नरकटिया गांव के लोगों की जिंदगी
पगडंडी के सहारे रेंगती है वेलवा नरकटिया गांव के लोगों की जिंदगी फोटो.एसइ-1 ग्रामीण, एसइ-2 एमएस नरकटिया, एसइ-3 पगदंडी. एसई4 वेलवा देवपुर मिसिंग लिंक रोड. एसइ-5 नाव से मवेशी का चारा लाते ग्रामीण. प्रतिनिधि,पिपराही . विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद वादो आश्वासनों का पिटारा भले ही खोला जा रहा हो. किंतु विकास के नाम […]
पगडंडी के सहारे रेंगती है वेलवा नरकटिया गांव के लोगों की जिंदगी फोटो.एसइ-1 ग्रामीण, एसइ-2 एमएस नरकटिया, एसइ-3 पगदंडी. एसई4 वेलवा देवपुर मिसिंग लिंक रोड. एसइ-5 नाव से मवेशी का चारा लाते ग्रामीण. प्रतिनिधि,पिपराही . विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद वादो आश्वासनों का पिटारा भले ही खोला जा रहा हो. किंतु विकास के नाम पर गांवों में कुछ नहीं दिख रहा है. एक विधानसभा का शिवहर जिला आज भी पिछड़ा जिला के रूप में गिना जाता है. प्रभात खबर की टीम ने नरकटिया गांव में जाकर लोगों से बात की. तो लोगों ने अपनी समस्या से रूबरू कराया है. जो इस गांव के पिछड़ेपन की कहानी व्यां कर जाती है. इस गांव में कदम रखते ही आदमयुग का ऐहसास करा जाता है. गांव में जाने के लिए कोई सड़क नहीं है. पगडंडी के सहारे लोगों की जिंदगी रेंगती है. प्रलयंकारी बाढ़ को झेल चुके गांव के लोग आज भी सड़क, शिक्षा,बिजली,स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओ से ग्रामीण आज भी वंचित है. प्रखंड के मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर पश्चिम शिवहर मोतीहारी मुख्य पथ स्टेट हाइवे से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव में करीब 1600 वोटर है. ग्रामीण 65 वर्षीय रामवृक्ष सहनी, राजिन्द्र सहनी ने कहा कि गांव में जाने के लिए रास्ता नहीं है. पगडंडी के सहारे गांव में जाना पड़ता है. दुल्हन व गांव के बहु बेटियों को पैदल ही गांव में आना जाना पड़ता है. हालत है कि शादी विवाह के अवसर पर दूल्हे को गोद में उठाकर गांव में ले जाने की नौबत रहती है. इस गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र तक नहीं है. स्वस्थ्य सेवा के लिए पिपराही, चंपारण , पचपकड़ी या ढ़ाका जाना पड़ता है. वेलवा देवापुर का मिसिंग लिंक रोड का निर्माण अधर में रहने के कारण आवागमन की समस्या बनी रहती है. 60 वर्षीय जनक सहनी व जगरनाथ दास ने बताया कि एक मध्य विद्यालय बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए स्थापित किया गया है. जहां पांच माह से मध्याह्न भोजन बंद है. शिक्षक के आने जाने का टाइम शिक्षक के मनमर्जी पर चलता है. बच्चों की शिक्षा महज खानापूर्ति तक सिमट कर रह गयी है. बरसात व बाढ़ के समय खेतों में जलजमाव की स्थिति रहती है. खेतों में अधिक पानी रहने से खेती संभव नहीं हो पाता है. ग्रामीण विंदेश्वर सहनी, सहदेव दास का कहना है कि गांव में बिजली सुविधा तो है, किंतु तार बांस के सहारे गांव तक ले जाने की लाचारी है. वही 70 वर्षीय कौशल्या देवी का कहना है कि जिसके पास पैसा है वे शौचालय निर्माण करा ले रहे है. किंतु गरीबों का घर आज भी शौचालय विहीन है. जिससे खुले में शौच की लाचारी बनी है.
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