दुर्गा स्थान, चकौती में वर्ष 1924 से होती है पूजा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बोखड़ा : प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में करीब दर्जन भर स्थानों पर दुर्गा पूजा होती आ रही है, इसमें चकौती दुर्गा स्थान पर निर्मित मां की प्रतिमा, पूजा विधि, बलि प्रदान व पूजा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की गयी व्यवस्था देखते बनता है. यह धारण है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मन्नत […]
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बोखड़ा : प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में करीब दर्जन भर स्थानों पर दुर्गा पूजा होती आ रही है, इसमें चकौती दुर्गा स्थान पर निर्मित मां की प्रतिमा, पूजा विधि, बलि प्रदान व पूजा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की गयी व्यवस्था देखते बनता है.
यह धारण है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मन्नत अवश्य पूरी होती है.
देखते ही बनता है धार्मिक स्थल
भव्य मंदिर व परिसर में निर्मित अतिथि गृह, समीप में बड़ा सा तालाब एवं आगे चौड़ी सड़क को देखते ही लगता है कि यह कोई बड़ा धार्मिक स्थल है. खुले वातावरण में शोभायमान इस मंदिर को देखते ही लोगों की मानो आधा कष्ट स्वत: दूर हो जाती है और मन प्रसन्न हो जाता है.
यहां वर्ष 1924 से होती है पूजा
बताया गया कि यहां वर्ष 1924 से ही मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा बना कर पूजा होती आ रही है. मंदिर निर्माण में अब तक 45 लाख रुपये खर्च किया जा चुका है और अब तक 60 फीसदी मंदिर का ही निर्माण हो पाया है.
तीन जिला के आते हैं श्रद्धालु
दुर्गा स्थान, चकौती शक्ति पीठ माना जाता है. यहां सालों पर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, पर खास कर दशहरा के समय सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर व दरभंगा जिला यानी तीन जिला के श्रद्धालुओं की भीड़ रही रहती है.
सच्चे मन से मांगी गयी हर याचना को मां पूरा करती है. यही कारण है कि यहां आने-जाने में होने वाली परेशानी को बावजूद भी लोगों का आने-जाने का सिलसिला लगा रहता है.
दुर्गा पूजा के समय अपार भीड़ के बावजूद पूजा समिति के सदस्यों की तत्परता के चलते बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होती है. यहां भक्तों के रहने के लिए अतिथि गृह, शौचालय, चापाकल, साफ-सफाई समेत अन्य सुविधाएं प्राप्त होती है. दशहरा के दौरान 501 कुंवारी कन्याओं द्वारा कलश शोभायात्रा निकाली जाती है. खास कर सप्तमी व नवमी को अपार भीड़ लगती है.
बलि प्रदान की प्रथा जारी
वर्षों से अध्यक्ष रहे यज्ञी मिश्र का हाल में हीं निधन हो गया है, जिसके चलते अध्यक्ष का पद अब तक रिक्त है. उपाध्यक्ष बेचन झा, राजकुमार ठाकुर, नागेंद्र मिश्र, सुशील ठाकुर, सचिव चंद्रमोहन ठाकुर, कोषाध्यक्ष प्रणव झा की मौजूदगी में उपाध्यक्ष श्री झा ने बताया कि यहां बलि प्रदान की प्रथा जारी है. सबसे पहले पूजा समिति की ओर से एक बकरे की बलि दी जाती है,
उसके बाद मन्नत मानने वाले श्रद्धालु बकरे की बलि देते हैं. पूजा समिति की ओर से हुई बलि प्रदान का प्रसाद आम लोगों में बांटा जाता है.
खर्च से अधिक होती है आय
बताया गया कि प्रति वर्ष स्वत: खर्च से अधिक आय होती है. यही कारण कि अब तक मंदिर निर्माण में पर्याप्त राशि खर्च हो चुकी है. गत वर्ष पूजा में तीन लाख 87 हजार रुपये खर्च हुए थे और चंदा से चार लाख से अधिक राशि संग्रह हुआ था. शेष राशि को मंदिर के विकास में खर्च किया गया.
पर्यटन स्थल का सपना अधूरा
उक्त दुर्गा स्थान की ख्याति सुन अक्सर यहां राज नेता आते रहते हैं. पूजा समिति के सचिव श्री ठाकुर ने बताया कि करीब पांच-छह वर्ष पूर्व राज्य के पर्यटन मंत्री यहां आये थे और आश्वासन दिया था कि इस स्थान को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाया जायेगा.
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