अस्पतालों में नहीं हैं सर्पदंश और एंटीरैबीज की दवाएं

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सीतामढ़ी : सदर अस्पताल व पीएचसी में कु त्ते के काटने एवं सर्पदंश की दवा नहीं होने से मरीजों में हाहाकार मच गया है. करीब एक माह से यह दोनों वैक्सीन नहीं है. इसके चलते आये दिन विशेष कर सदर अस्पताल में मरीजों के परिजन हंगामा करते रहते हैं. कर्मियों से मारपीट करने पर उतारू […]

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सीतामढ़ी : सदर अस्पताल व पीएचसी में कु त्ते के काटने एवं सर्पदंश की दवा नहीं होने से मरीजों में हाहाकार मच गया है. करीब एक माह से यह दोनों वैक्सीन नहीं है. इसके चलते आये दिन विशेष कर सदर अस्पताल में मरीजों के परिजन हंगामा करते रहते हैं. कर्मियों से मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं.
मरीजों को आर्थिक क्षति
बता दें कि सदर अस्पताल में प्रति दिन बड़ी संख्या में कुत्ते के काटने से पीड़ित व सर्पदंश के मरीज आते हैं. यह सोच कर कि अब व्यवस्था बदल गयी है, लेकिन मरीज व उनके परिजन का गुस्सा तब बढ़ जाता है जब अस्पताल के कर्मियों द्वारा यह जानकारी दी जाती है कि एआरवी व एवीएस नहीं है. यह सुन परिजन हंगामा करने लगते हैं. यह कोई एक दिन की बात नहीं रह गयी है. परिजन को बाजार से वैक्सीन खरीद कर मरीज को दिलाना पड़ रहा है.
बाजार में वैक्सीन नहीं
एआरवी व एवीएस खुले बाजार में भी उपलब्ध नहीं है. इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के प्रति मरीज व उनके परिजन का आक्रोश और बढ़ गया है. बता दें कि एआरवी का एक वायल 350 से 400 रुपये तक मिलता है. एक मरीज को तीन वायल लेना पड़ता है. इधर, सर्पदंश से पीड़ित एक मरीज को 10 वायल लेना पड़ता है. अस्पताल से मरीजों को लगातार एसकेएमसीएच रेफर किया जा रहा है. रेफर करने को लेकर भी मरीज के परिजन कर्मियों से बकझक करते हैं.
तीन ओपीडी पूरी तरह ठप
चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति रद्द कर दिये जाने से सदर अस्पताल में हड्डी व आंख रोग का ओपीडी पूरी तरह ठप पड़ गया है. इस रोग के मरीज भी चिकित्सक के नहीं रहने को लेकर प्रतिदिन हंगामा करते हैं. इस दौरान चिकित्सक व कर्मी सहम जाते हैं. महिला चिकित्सक की भी प्रतिनियुक्ति रद्द कर दी गयी. चार में से अब मात्र दो महिला चिकित्सक रह गयी है.
इसमें से भी एक चिकित्सक सुधा झा छुट्टी पर चली गयी हैं. दूसरी चिकित्सक संगीता झा को सप्ताह में दो दिन सदर अस्पताल में और शेष दिन सीएस कार्यालय में ड्यूटी करनी है. सूत्रों ने बताया कि संगीता झा अस्पताल में नियमित ओपीडी नहीं कर पाती हैं. महिला मरीजों का हंगामा करना भी आम बात हो गयी है.
कंपनी के पास दवा नहीं
बताया गया है कि डीएमआइसीएल दवा उपलब्ध कराती थी. उसके पास दवा नहीं है. टेंडर निकाला गया था.
एक मात्र कंपनी के टेंडर में भाग लेने के चलते उसे रद्द कर दिया गया. एक और आपूर्तिकर्ता का अनुबंध गत वर्ष समाप्त हो गया. बावजूद उसे एवीएस व एआरवी की मांग की गयी. उसके पास भी दवा नहीं है.
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