डीएओ ने की बोखड़ा व नानपुर में लगी गेहूं की फसल की जांच
गेहूं की बाली में दाना नहीं लगने से किसानों का एक बड़ा वर्ग चिंतित है. यह बात अलग है कि किसानों को फसल की क्षति का मुआवजा मिलेगा. बावजूद जिले के किसान मिलने वाले मुआवजा से खुश नहीं है. इस बीच, प्रभात खबर में शुक्रवार को ‘गेहूं की बाली में दाना नहीं आने से किसान चिंतित’ शीर्षक से छपी खबर पर डीएम डा प्रतिमा के आदेश पर डीएओ पीके झा नानपुर प्रखंड में गेहूं की बाली की जांच किये. उन्होंने माना कि वास्तव में दाना नहीं लगा है.
सीतामढ़ी/बोखड़ा : डीएम डा प्रतिमा के आदेश पर करीब-करीब सभी प्रखंडों में गेहूं की बाली में दाना नहीं लगने की जांच की जा रही है. डीएओ प्रवीण कुमार झा नानपुर व बोखड़ा प्रखंड में गेहूं की बाली में दाना नहीं लगने की जांच किये. जांच के बाद श्री झा ने स्वीकार किया कि दाना नहीं लगा है. इस क्षेत्र के किसान प्रभावित हुए है. डीएम को जांच रिपोर्ट सौंपी जायेंगी.
45 प्लॉट का जायजा
डीएओ श्री झा ने नानपुर प्रखंड क्षेत्र में सड़क किनारे के 45 प्लॉट में लगे गेहूं की पौधों की जांच किये. बताया कि 28 प्लॉट में गेहूं का बोझा बांध कर रखा हुआ था.
दाना नहीं लगने से एक तो किसान भी गेहूं काटने को इच्छुक नहीं है तो मजदूर भी गेहूं की कटनी करने से कतरा रहे हैं. श्री झा ने धरातल पर जाकर गेहूं की फसल की क्षति व किसानों के दर्द को महसूस किया. श्री झा ने प्रभावित किसानों के घर पर पहुंच उनसे क्षति की बाबत जानकारी ली.
पहले खेतों पर पहुंचे व वहां गेहूं की बाली को देखने के बाद संबंधित किसान से बात किये. यह जानने की कोशिश की कि खेती पर कितने खर्च हुए थे और बाली में दाना नहीं लगने से उन्हें कितनी क्षति हुई. किसानों ने उन्हें बताया कि एक कट्ठा में चार-पांच किलों गेहूं की उपज हुई है.
किसानों की आंखों में आंसू
गेहूं की हुई क्षति से उत्पन्न समस्या से डीएओ को अवगत कराने के दौरान कई किसानों की आंखों में आंसू आ गये. डीएओ ने बताया कि फसल की क्षति से किसी किसान के दिल पर क्या बीतती है, यह उन्हें नजदीक से देखने व सुनने का मौका मिला. बताया कि वास्तव में गेहूं की फसल की क्षति हुई है.
क्षति का कारण पछुआ हवा
जांच कर लौटने के बाद डीएओ श्री झा प्रखंड कार्यालय पहुंचे. वे अपने साथ गेहूं की कुछ बाली भी लेकर आये थे. बीडीओ किशोर कुणाल ने भी बाली को टटोल कर पाया कि दाना नहीं लगा है. डीएओ श्री झा कहते हैं कि गेहूं की बीज में कोई कमी नहीं थी. प्रयोगशाला से जांच के बाद ही बीज का वितरण किया जाता है.
बताया कि गेहूं के पौधों पर प्राकृतिक की मार पड़ी है. यानी पछिया हवा के चलते गेहूं के दाना का दूध सुख गया, जिसके चलते दाना नहीं बन सका.
