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झमाझम बारिश से नर्सरी व फसलों में आयी जान

Updated at : 29 Jun 2019 2:07 AM (IST)
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झमाझम बारिश से नर्सरी व फसलों में आयी जान

सीतामढ़ी : शुक्रवार की अहले सुबह करीब पांच से छह बजे के बीच झमाझम बारिश हुई. इससे पूर्व मंगलवार की रात को भी बारिश हुई थी, जिससे खेतों के सिर्फ दरारें भर पायी थी. शुक्रवार की सुबह कुछ देर के लिए हुई झमाझम बारिश से अब खेतों में भी पानी लगना शुरू हो गया है. […]

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सीतामढ़ी : शुक्रवार की अहले सुबह करीब पांच से छह बजे के बीच झमाझम बारिश हुई. इससे पूर्व मंगलवार की रात को भी बारिश हुई थी, जिससे खेतों के सिर्फ दरारें भर पायी थी.
शुक्रवार की सुबह कुछ देर के लिए हुई झमाझम बारिश से अब खेतों में भी पानी लगना शुरू हो गया है. पानी के लिए तरस रहे धान के नर्सरियों में भी जरूरत जितना पानी भरने से किसान प्रसन्न हैं. धान की नर्सरी पानी के बगैर पीले पड़ गये थे. अब इन नर्सरियों में जान आ गई है. काफी सारे किसान खेतों की जुताई कराकर बारिश का इंतजार कर रहे थे. इंद्रदेव ने ऐसे किसानों की मुरादें भी पूरी कर दी है. धान की नर्सरियों के अलावा मूंग, उड़द, तिल, गन्ना आदि फसलों वाली खेतों में पानी जमा होने से जल रहे फसलों में जान आ गयी है और फसलें लहलहाने लगी है.
आद्रा नक्षत्र में वर्षा, फसल के लिए वरदान
रीगा : आद्रा नक्षत्र की पहली बरसात शुक्रवार की सुबह होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है. खास कर धान के बिचड़ा तैयार होने में बारिश वरदान साबित होगा. किसान महेश पासवान, रवींद्र कुमार, आसनारायण साह व विनोद महतो समेत अन्य ने बताया कि इस वर्षा से बिचड़े को संजीवनी मिली है. इस नक्षत्र का पानी फसल के लिए काफी लाभदायक माना जाता है.
वहीं, दूसरी ओर लगातार दो दिन बारिश होने से प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न जर्जर सड़क व उस पर बने गड्ढ़े में पानी लग जाने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जगह-जगह सड़क पर लगा पानी स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, स्थानीय प्रशासन व सरकार की पोल खोल रही है. उदाहरण के तौर पर रामपुर गंगोली पुल के समीप सड़क पर बने गड्ढ़े में एक फिट पानी लग जाने से वाहन व लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
जिले में 98 हजार हेक्टेयर में होगी धान की खेती: डुमरा. खरीफ मौसम में अबतक 8020 हेक्टेयर में धान की रोपनी की गयी है. कृषि विभाग द्वारा खरीफ मौसम में धान की रोपनी के लिए किसानों को श्री विधि तकनीक को अपनाने का सलाह दिया जा रहा है. साथ ही सिंचाई व खरपतवार नियंत्रण के उपाय भी बतायी जा रही है. बताया गया है की जिले में 98 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य है. जिसमें अबतक 8020 हेक्टेयर में रोपनी कर ली गयी है.
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