संसाधन बढ़े, पर अस्पताल में नहीं हैं सर्जन चिकित्सक

Published at :02 Feb 2018 5:22 AM (IST)
विज्ञापन
संसाधन बढ़े, पर अस्पताल में नहीं हैं सर्जन चिकित्सक

परेशानी. मरीजों को नहीं मिल पा रही है समुचित चिकित्सा सदर अस्पताल का हाल नशामुक्ति केंद्र में चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं शासन व प्रशासन को नहीं है मरीजों की चिंता सीतामढ़ी : सदर अस्पताल में हर वर्ष संसाधन बढ़ रहा है, लेकिन चिकित्सक व कर्मियों के रिक्त पद पर नयी बहाली नहीं हो रही है. […]

विज्ञापन

परेशानी. मरीजों को नहीं मिल पा रही है समुचित चिकित्सा

सदर अस्पताल का हाल
नशामुक्ति केंद्र में चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं
शासन व प्रशासन को नहीं है मरीजों की चिंता
सीतामढ़ी : सदर अस्पताल में हर वर्ष संसाधन बढ़ रहा है, लेकिन चिकित्सक व कर्मियों के रिक्त पद पर नयी बहाली नहीं हो रही है. इसके चलते मरीजों को संसाधनों का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. यह समस्या काफी समय से बरकरार है. फिर भी सरकार के स्तर से चिकित्सक व कर्मी के रिक्त पद पर बहाली के लिए ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिसका परिणाम उन मरीजों को भुगतना पर रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते सदर अस्पताल में इलाज कराने आते हैं.
आज तक चालू नहीं हुआ जेनेरेटर: सदर अस्पताल परिसर में एसएनसीयू का उद्घाटन डीएम राजीव रौशन ने किया था. यहां कॉन्ट्रैक्ट पर मात्र एक चिकित्सक बहाल है. कुछ इन्हीं कारणों से दिन व दिन यहां भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में कमी आती जा रही है. एसएनसीयू के पास नया जेनेरेटर है, जो आजतक चालू नहीं हो सका है, जबकि लो वोल्टेज के चलते कई वेंटिलेटर काम नहीं करता है. इस सबके के बावजूद अधिकारी खामोश बने हुए है.
बेकार बन गया है पैथोलॉजी केंद्र: नशा मुक्ति केंद्र में एक भी चिकित्सक नहीं है. विभाग की नजर में अब शायद ही कोई व्यक्ति शराब का आदि होगा, पर सच्चाई यह है कि प्रतिदिन पुलिस दर्जन भर शराबियों को पकड़ती है, जिसमें कुछ लोग शराब के आदि भी होते है. कतिपय कारणों से आदि शराबियों को यहां भर्ती नहीं कराया जाता है. पैथोलॉजी केंद्र में नौ के बजाय मात्र तीन कर्मी है. सरकार जांच की सामग्री देती है, पर कर्मियों की कमी के कारण बहुत से मरीजों को बाहर में जांच करानी पड़ती है.
67 में से मात्र आठ चिकित्सक कार्यरत: एक्स-रे केंद्र में कर्मियों का 12 पद सृजित है, जबकि कार्यरत है मात्र एक कर्मी. लाखों की मशीन उपयोग के अभाव में खराब हो रही है. यहां चिकित्सक के 67 पद है, जिसकी तुलना में आठ चिकित्सक है. कुछ चिकित्सक कॉन्ट्रैक्ट पर है. कार्यालय परिचारी के 50 में से 33 पद खाली है. 50 में से मात्र दर्जन भर नर्स है.
90 फीसदी मरीज होते हैं रेफर
विभागीय सूत्रों ने बताया कि गोलीबारी, चाकूबाजी व दुर्घटना में गंभीर रूप से जख्मी मरीजों में से 90 फीसदी को सदर अस्पताल से रेफर करना पड़ता है. कारण वही चिकित्सक व कर्मी की भारी कमी. विभाग के हालात व मरीजों को मिल रही चिकित्सा सुविधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदर समेत किसी भी पीएचसी में एक भी सर्जन चिकित्सक नहीं है. अस्पताल
में 17 ड्रेसर में से मात्र तीन कार्यरत है. ओटी सहायक एक भी नहीं है.
कहते हैं उपाधीक्षक
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ शकील अंजुम ने बताया कि संसाधन तो बढ़ रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य कर्मचारियों व चिकित्सकों की कमी से परेशानी हो रही है. वर्तमान व्यवस्था से विभाग व सिविल सर्जन को अवगत कराया जा चुका है.
डॉ शकील अंजुम, सदर अस्पताल उपाधीक्षक
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन