योजनाओं में वैट की कटौती नहीं करने पर जतायी आपत्ति

Published at :07 Dec 2017 8:22 AM (IST)
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योजनाओं में वैट की कटौती नहीं करने पर जतायी आपत्ति

अनिबंधित दुकान से की गयी सीमेंट की खरीद पर महालेखाकार ने पत्र भेज मांगा जवाब सीतामढ़ी : योजना सरकारी और सीमेंट की खरीद की गयी एक ऐसे दुकान से जो निबंधित ही नहीं था. यह सुनने में कुछ अटपटा लगता है, लेकिन सच है. इतना हीं नही, संबंधित विभागीय अधिकारियों ने उक्त सीमेंट दुकान से […]

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अनिबंधित दुकान से की गयी सीमेंट की खरीद पर महालेखाकार ने पत्र भेज मांगा जवाब
सीतामढ़ी : योजना सरकारी और सीमेंट की खरीद की गयी एक ऐसे दुकान से जो निबंधित ही नहीं था. यह सुनने में कुछ अटपटा लगता है, लेकिन सच है.
इतना हीं नही, संबंधित विभागीय अधिकारियों ने उक्त सीमेंट दुकान से खरीद किये गये सीमेंट के कूल मूल्य पर वैट की कटौती भी नही की. इस तरह और भी गड़बड़ी की गयी है.
इस गड़बड़ी को पकड़ी है महालेखाकार की टीम ने. मामला डुमरा प्रखंड का है. टीम की जांच रिपोर्ट पर महालेखाकार ने डुमरा बीडीओ को पत्र भेजकर जवाब मांगा है.
दूसरी योजना का सच : योजना संख्या 24/13-14 में मिट्टीकरण व ईंट-सोलिंग का कार्य कराया गया था. इस कार्य के लिए देशप्रेमी ईंट उद्योग, खैरवा से ईंट की खरीद की गयी थी. उक्त चिमनी मालिक से वैट के रूप में 3372 रुपये की कटौती नहीं की गयी थी. इस योजना में भी मास्टर रॉल पर भुगतान नहीं किया गया था. महालेखाकार की आपत्ति पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने बीडीओ को जवाब देने को कहा है.
तीसरी योजना का सच : भूपभैरों पंचायत में पीसीसी सड़क का निर्माण कराया था. इसके लिए व्याहुत ट्रेडर्स, सीतामढ़ी से सीमेंट व अन्य सामग्री की खरीद की गयी थी, जबकि उक्त दुकान निबंधित नहीं था. उक्त दुकान से वैट के रूप में 10 हजार 711 रुपये की कटौती नहीं की गयी थी. इस तरह के और भी कई मामले है.
क्या है पूरा मामला
बताया गया है कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के तहत 15 चापाकल लगाया गया था. अभिकर्ता थे ग्रामीण प्रसार कार्यकर्ता शिवनाथ राम. योजना वर्ष 2014-15 का है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चापाकल की सामग्री की खरीद में दुकानदार को एक लाख 97 हजार 500 रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन कुल भुगतान पर पांच प्रतिशत वैट की कटौती नहीं की गयी.
अधिकारी इस चीज को एक तरह से भूल गये थे, पर मामला उजागर हो ही गया. उक्त योजना में मिस्त्री व मजदूर को मास्टर रॉल पर भुगतान करना था, लेकिन हैंड रिसिप्ट पर एक लाख 05 हजार 86 रुपये मजदूरी का भुगतान किया गया था.
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