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VIDEO रामनवमी पर विशेष : बिहार में शेखपुरा के इस गांव में घरों पर नहीं लहराये जाते महावीरी ध्वज

Updated at : 04 Apr 2017 3:56 PM (IST)
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VIDEO रामनवमी पर विशेष : बिहार में शेखपुरा के इस गांव में घरों पर नहीं लहराये जाते महावीरी ध्वज

शेखपुरा: राजनैतिक सियासत, धार्मिक मान्यताओं से अलगबिहारमें शेखपुरा के पथलाफार गांव में ख्वाजा इसहाक मगरवी का मटोखर दाह पर स्थित मजार के सम्मान में लोग राम नवमी का ध्वज नहीं गाड़ते. यह प्राचीन परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस परंपरा का लोग काफी गंभीरता से निर्वहन करते हैं. सदियों से चली आ रही […]

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शेखपुरा: राजनैतिक सियासत, धार्मिक मान्यताओं से अलगबिहारमें शेखपुरा के पथलाफार गांव में ख्वाजा इसहाक मगरवी का मटोखर दाह पर स्थित मजार के सम्मान में लोग राम नवमी का ध्वज नहीं गाड़ते. यह प्राचीन परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस परंपरा का लोग काफी गंभीरता से निर्वहन करते हैं. सदियों से चली आ रही इस परंपरा की मुख्य मान्यता यह है कि गांव से पश्चिम दिशा में लगभग एक किलोमीटर दूर मटोखर दाह के छोर पर स्थित बाबा साहेब के ऐतिहासिक मजार होने के कारण यहां रामनवमी ध्वज घरों में नहीं गाड़ा जाता है.

इस मौके पर ग्रामीण अरुण चौहान, कैलाश चौहान, सुरेंद्र यादव, मोती यादव ने बताया कि इलाके के लोग मटोखर शरीफ में भी अपनी आस्था रखते हैं. इसी वजह से किसी अनहोनी का खौफ रहने के कारण यहां लोग अपने घरों में रामनवमी का ध्वज नहीं गाड़ते है.

क्या है पथलाफार गांव की मान्यता
शेखपुरा जिले के पथलाफार गांव में रामनवमी की पूजा को लेकर एक अलग ही मान्यता है. आमतौर पर अपनी आस्था और मनोकामनाओं को लेकर लोग अपने-अपने घरों में ही रामनवमी की पूजा अर्चना के बाद ध्वज गाड़ते है. लेकिन पथलाफर गांव में अपने आस्था और मन्नतों को लेकर लोग वहां के महारानी मंदिर परिसर में ही रामनवमी की पूजा अर्चना कर वही सामूहिक रुप से झंडा भी गाड़ते हैं. ग्रामीणों की मानें तो ख्वाजा साहब के इस मजार के प्रति भी ग्रामीणों की आस्था है. किसी भी आपदा या मनोकामना को लेकर जब वहां दुआ मांगते हैं तब उनकी मुरादें पूरी होती है. ऐसे में मजार के ठीक सामने बसे इस गांव में रामनवमी की पूजा ध्वज घर में गाड़े जाने पर किसी अनहोनी का भय बना रहता है.

प्रतिवर्ष खसरा का फैल जाता है प्रकोप
जिले में रामनवमी की पूजा से एक और भी मान्यता लोगों के दिलों में घर कर बैठा है. इसे महज संयोग कहे या किसी प्रकार के संक्रमण का असर. प्रत्येक वर्ष रामनवमी से एक माह पूर्व ही पाठलाफार गांव में खसरा का रोग पांव पसारने लगता है. लोग इस बीमारी के कारण भी रामनवमी की पूजा नहीं किए जाने की मान्यता रखते हैं. गांव में लोगों की अलग अलग तरह की धारणा से यह तो तय है कि सामूहिक रूप से इस गांव में लोग अपने-अपने घरों में रामनवमी पूजा का ध्वज नही गाड़ते.

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी रामनवमी के दौरान ही खसरा की महामारी ने एक युवक की जान ले ली थी. बल्कि दर्जनों लोग इस बीमारी से आक्रांत थे. बड़ी बात है यह भी है कि गांव में लगातार हो रही इस बीमारी को लेकर चिकित्सकों के दल ने पीने के इस्तेमाल में हो रहा है पानी का दूषित होने की संभावना जताते हुए इसका सैंपल संग्रह कर जांच की कारवाई करने का पहल करनी शुरू किया था. लेकिन आज तक इस दिशा में कोई अस्पष्ट कारण नहीं बताया जाने से लोग परेशान हैं.

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