पानापुर के बेघरों को राहत नहीं परेशानी. एक माह पहले पानापुर गांव में धंस गयी थी जमीन
Updated at : 13 Dec 2016 5:48 AM (IST)
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गांव में पीड़ित परिवार. शेखपुरा : बेघर चानो उदास कहते हैं एक महीना पूर्व गांव में जब जमीन धंसने लगी तो उनका बसा बसाया संसार उजाड़ सा गया. काफी जद्दोजहद से बनाये गये घर धराशायी हो गये. लेकिन कड़ाके की ठंड में अब परिवार को राहत देना असंभव सा लग रहा है. क्योंकि इस आपदा […]
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गांव में पीड़ित परिवार.
शेखपुरा : बेघर चानो उदास कहते हैं एक महीना पूर्व गांव में जब जमीन धंसने लगी तो उनका बसा बसाया संसार उजाड़ सा गया. काफी जद्दोजहद से बनाये गये घर धराशायी हो गये. लेकिन कड़ाके की ठंड में अब परिवार को राहत देना असंभव सा लग रहा है. क्योंकि इस आपदा के बाद राहत का वायदा कर सरकार के नुमाइंदे आज तक वापस नहीं लौटे.
घटना के बाद जांच करने पहुंचे अधिकारी ने त्रिपाल और अन्य खाद्य सामग्रियों तत्काल राहत के रूप में देने का वादा किया था. लेकिन विडंबना यह है कि वायदे के एक माह बाद भी कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे महादलित परिवारों के लिए अधिकारियों की नींद नहीं टूट सकी. अब तो भगवान ही है जो इस दोहरे आपदा में राहत की आस जगा सकता है. घाटकुसुम्भा प्रखंड के पानापुर गांव में करीब दो दर्जन महादलित परिवार या तो दूसरे के घरों में स्कूल भवनों में या खुले आसमान में इस ठंड के रात को गुजारने के लिए विवश हैं.
बाढ़ की त्रासदी के बाद थोड़ी राहत की स्थिति बनने लगी तब गांव के महादलित टोले की जमीन अचानक से धंसने लगे करीब 2 से 3 फिट जमीन धंसने के बाद गांव में दो दर्जन महादलितों का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त घरों का जायजा लेकर परिवारों को मकान खाली करने का निर्देश भी दिया. लेकिन राहत का लाभ नहीं दे सके.
लखीसराय अंचल का है मामला : जिले के घाटकुसुंभा प्रखंड का पानापुर पंचायत आज भी दो जिलों के बीच फंसकर अपनी आजादी की जद्दोजहद से जूझ रहा है. दरअसल पानापुर पंचायत और गांव शेखपुरा जिले का हिस्सा है लेकिन इसका राजस्व आज भी लखीसराय जिले का ही हिस्सा बना हुआ है. इस आपदा की घड़ी में राहत एवं मुआवजे की जिम्मेवारी लखीसराय अंचल प्रशासन की होती है. इस घटना को जब प्रभात खबर ने प्रमुखता से उठाया तब लखीसराय अंचलाधिकारी ने घटनास्थल का जायजा लिया. लेकिन पीड़ितों को तत्काल राहत एवं मुआवजे की दिशा में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन देकर जाने के बाद आज तक वापस नहीं लौटे.
कैसे गुजर रही रात : जमीन धंसने के बाद बेघर होने की आपदा से जूझ रहे पानापुर के महादलित परिवारों का दिसंबर महीने की ठंड भरी रात कैसे गुजर रही इसका एहसास हर इनसान को है. ठंड से मुकाबले को लेकर जहां आबादी भारी जद्दोजहद का सामना कर रहा है वहीं बेघर परिवारों को रात तो रात ठंड का यह दिन भी गुजारना मुश्किल हो रहा है. ठंड से मुकाबले के इस दौर में यहां आदमी और मवेशियों में फर्क का नहीं होना भी आम बात हो गयी है. पुरुषों के साथ बुजुर्ग बच्चे एवं महिलाओं का जीना दुर्लभ हो गया है.
पीड़ित परिवारों की सूची : चनो दास, मंटू दास, दुखी दास, परशुराम दास, ब्रह्मदेव मोची, दशरथ दास, मनोज दास, राजू दास, भोला दास, शंकर दास, अशोक मोची, नारायण मोची, विनोद मोची, महेंद्र मोदी
क्या कहते हैं अधिकारी
बीडीओ से साक्ष्य के साथ रिपोर्ट की मांग की गयी थी .अभी तक रिपोर्ट नहीं मिल सका है.जिला परिषद में भी बात सामने आयी है.क्षति का आकलन कर विभाग को रिपोर्ट भेजकर मुआवजे की कार्रवायी की जायेगी. तत्काल राहत के लिए अभी कोई पीड़ित सामने आकर अपनी मांग नहीं रखे है.सामने आने पर उन्हें भी लाभान्वित किया जायेगा.
निरंजन कुमार झा, प्रभारी जिलाधिकारी शेखपुरा
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