या बाबा करदे मुरादें हमारी पूरी

Updated at : 17 Nov 2016 4:08 AM (IST)
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या बाबा करदे मुरादें हमारी पूरी

उमंग. मटोखर शरीफ के उर्स मेले में हजारों जायरीनों ने मांगीं मन्नतें मेले में श्रद्धालुओं की भीड़. मजार पर चादरपोशी करते लोग. दुआ मांगती बच्ची. बंगाल,उड़ीसा,झारखंड और बिहार के जायरीनों से पटा मटोखर शरीफ शेखपुरा : सांप्रदायिक एकता के लिए आस्था का केंद्र कहे जाने वाले मटोखर शरीफ दो दिवसीय सलाना उर्स मेले से पटा […]

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उमंग. मटोखर शरीफ के उर्स मेले में हजारों जायरीनों ने मांगीं मन्नतें

मेले में श्रद्धालुओं की भीड़. मजार पर चादरपोशी करते लोग.
दुआ मांगती बच्ची.
बंगाल,उड़ीसा,झारखंड और बिहार के जायरीनों से पटा मटोखर शरीफ
शेखपुरा : सांप्रदायिक एकता के लिए आस्था का केंद्र कहे जाने वाले मटोखर शरीफ दो दिवसीय सलाना उर्स मेले से पटा रहा. बुधवार को माले के दुसरे दिन हजारों जायरीनों ने ख्वाजा इशहाक मगरवी रह्मातुल्लैह अलाह के 644 वें सालाना वफात के मौके पर जहां अपनी मुरादे मांगी. वही मुरादे पूरी करने वालों ने बड़ी तायदाद में बाबा के मजार पर चादरपोशी की.
इस उर्स के मौके पर हजारों की संख्या में जुटे जायरीनों ने मटोखर शरीफ के ऐतिहासिक व मनोरम मटोखर दह का आनंद उठाया. सदर प्रखंड के मटोखर गांव स्थित ऐतिहासिक एक किलोमीटर लंबी झील पर ख्वाजा इशहाक मगरवी के दरबार में सालाना उर्स मेले का आयोजन की तैयारी में भक्तों ने कोइ कोर कसार नहीं छोड़ा. भवन के अलावे भव्य पंडाल के साथ रहने समेत अन्य जरुरी सुविधाएं मुहैया करायी. पुराणी मान्यता यह कि बाबा के दरबार में निष्ठा के साथ जो मुरादे मांगी जाती है पूरी होती है.
क्या है मान्यताएं : ऐतिहासिक मटोखर शरीफ को लेकर मान्यताएं है की बाबा ख्वाजा इशहाक मगरवी ईराक के नामी फकीर थे. लेकिन इसी एतिहासिक स्थल पर उन्होंने अपने जीवन का त्याग किया था.उसी वक्त वहां बाबा साहेब का मजार बनाया गया.सालो भर दोनों समुदाय के श्रद्धालु अपनी मुरादों को लेकर अपनी मन्नते मानते है.इसके वाद मन्नते पूरी होने पर वहा बकरे की बलि देते है.एतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मटोखर शरीफ के लिए सालाना वफात का दिन काफी अहम् होता है.
दुआ के साथ चादरपोशी : यहां सालाना उर्स में सर्व प्रथम मजार पर हजारो जायरीनों के बिच तिलावत से मेले की शुरुआत होती है.इसके वाद यहां जायरीन बारी बारी कर मजार पर चादर पोशी करते है.यह शील शिला अगले दो दिनों तक जारी रहता है.इस दौरान जायरीन संताल ,बच्चों की ऊँची तालीम,शादी,और व्यवसाय से जुडी मन्नतो को मांग कर बाबा के मजार पर कुरानखानी करते है.यहां मजार के समीप महिलाओं का आना सख्त वर्जित रखे जाने की परम्परा आज भी जारी है.महिलाए दूर से ही बाबा के मजार का दर्शन कर मन्नते मांगते है.
तैयारी में खूब दिखाए दिलचस्पी : इस मजार के खदीम दरगाह मो.शलीम,सलाउद्दीन,असगर हुसैन,शकील अहमद,शईद आलम ने बताया की उर्स मेले में आने वाले हजारो लोगों के लिए झुला,कई तरह के फास्ट फ़ूड ,किताबें,और मनोरजन भक्ति से जुड़े स्टाल भी लगाए जाते है.यहां सुरक्षा और सुविधा के लिए जिला प्रशासन कोइ पहल कदमी नहीं दिखा रहा है.
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