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निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान

Updated at : 24 Apr 2017 12:42 AM (IST)
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निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान

शिक्षा. डीइओ ने कहा, गाइडलाइन का किया जायेगा पालन एनसीइआरटी के बदले अन्य प्रकाशकों की महंगी किताबें चला रहे स्कूल संचालक पुपरी : सीबीएसइ समेत अन्य बोर्ड से संबद्ध ज्यादातर निजी स्कूल एक बार फिर राज्य व केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन को दरकिनार कर एनसीइआरटी की सस्ती किताबों की जगह अन्य प्रकाशनों […]

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शिक्षा. डीइओ ने कहा, गाइडलाइन का किया जायेगा पालन

एनसीइआरटी के बदले अन्य प्रकाशकों की महंगी किताबें चला
रहे स्कूल संचालक
पुपरी : सीबीएसइ समेत अन्य बोर्ड से संबद्ध ज्यादातर निजी स्कूल एक बार फिर राज्य व केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन को दरकिनार कर एनसीइआरटी की सस्ती किताबों की जगह अन्य प्रकाशनों की मंहगी किताबें खरीदने के लिए स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं. वह भी बगैर किसी पक्के रसीद के. लिहाजा एनसीइआरटी की जो किताबें अभिभावकों को पक्के रसीद के साथ एक से डेढ़ सौ रुपये में आसानी से उपलब्ध हो सकती है वैसी ही किताबें बाजार में अभिभावकों को चार से पांच सौ रुपये में खरीदना पड़ रहा है. जिसे खरीदने के लिए स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर जबरदस्त दबाव डाल रहे है.
जबकी सरकार ने निजी प्रकाशनों के बजाय स्कूलों को सिर्फ एनसीइआरटी की सस्ती किताबों से ही पढ़ाई करवाने का निर्देश जारी कर रखा है. निजी स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग गाइड लाइन तो तय करती है. पर कार्रवाई करने में अधिकारियों के हाथ कांप जाते हैं.
अभिभावक अरविंद कुमार आनंद, गुलाब ठाकुर, मनोरमा देवी, मुन्नी देवी, ममता कुमारी व निर्मला देवी ने बताया कि पूरे पाठ्यक्रम में एक से दो पुस्तकें ही मात्र एनसीइआरटी की है. शेष सभी पुस्तकें अन्य प्रकाशनों की है. पहली कक्षा के ही बच्चों की किताबें खरीदने में पंद्रह से सोलह सौ रुपये की वसूली की जाती है. और कॉपी की चार सौ से पांच सौ रुपये अलग से वसूली जाती है. हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी होती है.
सरकार की गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे संचालक
निजी स्कूलों पर शिकंजा नहीं
सरकार के द्वारा जारी गाइड लाइन के बावजूद मनमानी कर रहे निजी स्कूलों पर कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा है. जिसका फायदा निजी स्कूल प्रबंधन बखूबी उठा रहे हैं. इसके आलावा स्कूल प्रबंधन री – एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से हजारों रुपये की वसूली करते हैं. लिहाजा अभिभावक दोहरी मार झेलने को विवश हैं. निजी स्कूलों के मनमानी पर रोक लगाने में अब तक जिला प्रशासन भी नाकाम रहे हैं. यही वजह है कि अभिभावकों की गाढ़ी कमाई लूट रही है.
पढ़ाई-लिखाई की जगह स्कूल के
िवकास पर ज्यादा ध्यान
बच्चों का शैक्षणिक विकास कम और स्कूलों का विकास ज्यादा हो रहा है. साथ ही ट्यूशन फीस के आलावा प्रबंधन अभिभावकों से परीक्षा फीस, खेल, विज्ञान, पेपर – पत्रिका, कम्प्यूटर समेत कई अन्य फीस भी वसूलते है. इतने पर भी प्रबंधन की भूख कम नहीं होती. अभिभावकों को नामांकन के समय ही प्रबंधन दबाव डालकर निर्धारित दुकानों से ही ड्रेस व किताब-कॉपी की खरीददारी करने को भेजते हैं. जहां बाजार से ऊंची मूल्य पर खरीददारी करने को अभिभावक मजबूर हैं.
निजी स्कूलों में एनसीइआरटी की पुस्तकों से पढ़ाई करना है. सामान्य ज्ञान के लिए एक दो पुस्तकें अन्य प्रकाशनों की उपयोग करना है. सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार सभी निजी विद्यालयों में नियमों का पालन कराया जा रहा है. नियम के विरुद्ध चलने वाले स्कूल संचालक के खिलाफ कारवाई की जायेगी.
सुरेश प्रसाद, डीइओ
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