अपात्र लाभुकों के नाम किया खाद्यान्न का उठाव

Updated at : 05 Dec 2016 4:22 AM (IST)
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अपात्र लाभुकों के नाम  किया खाद्यान्न का उठाव

शिवहर : बेलसंड विधायक प्रतिनिधि राणा रणधीर सिंह चौहान ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में परिवाद दायर कर अपात्र लाभुकों के नाम खाद्यान्न का उठाव किये जाने का मामला दर्ज कराया है. आवेदन में जिला प्रशासन पर सवाल खड़ा करते हुये उन्होंने जिला प्रशासन को कठधेरे में खड़ा कर दिया है. आवेदन में खाद्य […]

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शिवहर : बेलसंड विधायक प्रतिनिधि राणा रणधीर सिंह चौहान ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में परिवाद दायर कर अपात्र लाभुकों के नाम खाद्यान्न का उठाव किये जाने का मामला दर्ज कराया है. आवेदन में जिला प्रशासन पर सवाल खड़ा करते हुये उन्होंने जिला प्रशासन को कठधेरे में खड़ा कर दिया है.

आवेदन में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मुख्य सचिव व सरकार के सचिव के हवाले से कहा गया है कि निर्देश के अनुसार पूर्व के अंतोदय लाभुकों की सर्वे कराकर योग्य अंतोदय के लाभुकों का एसइसीसी तैयार कराया जाना है. जिसमें अपात्र लाभुकों को उक्त आवंटन से वंचित कर देने का निर्देश था.

किंतु एक जुलाई 2015 से जिले के अंदर अपात्र लाभुकों का नाम खाद्यान्न का उठाव दिखाकर खाद्यान्नों की गवन की गई है. जिससे पात्र परिवारों एक जुलाई 2015 से अब तक खाद्यान्न से बंचित होना पड़ रहा है. पत्र के अनुपालन में योग्य अंतोदय परिवार को ही खाद्यान्न मुहैया करानी थी. किंतु जिला प्रशासन द्वारा पूर्व की संख्या के आधार पर खाद्यान्न की आपूर्ति होती रही है. जिसके कारण एसइसीसी डाटा में अंकित नहीं रहने वाले लाभुकों को ही खाद्यान्न की आपूर्ति की गयी है.
जो विधि सम्मत नहीं है. दायर परिवाद में मुख्य सचिव के पत्र का हवाला देते हुये कहा गया है कि पत्र के अनुसार राशन कार्ड मुद्रण के समय यह सुनिश्चत किया जाना था कि जिन अंतोदय परिवार व पूरवर्ती प्राप्त लाभार्थी का राशन कार्ड मुद्रण किया जा रहा है. उसका नाम एसइसीसी आधारित आंकड़ों के पात्र परिवार के सूचि में शामिल हो.
उक्त डाटा वेस एसईसीसी से अलग कोई राशन कार्ड मुद्रण या वितरण किया जाता है. तो उसकी पूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी.
भारत सरकार द्वारा उन्हीं एसइसीसी आंकड़ों के आधार पर खाद्यान्न का आवंटन किया जा रहा है. जिन्हे नेशनल सर्वर पर अपलोड किया गया है. कहा गया है कि जिला प्रशासन कोई कारगर कार्रवाई नहीं कर पायी है. जिससे करोड़ों के खाद्यान्न का गबन किया गया है. जिला प्रशासन वांछित प्रपत्र डाटा ली होती तो इस तरह गबन की बात सामने नहीं आती.
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