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बढ़ती ठंड से आलू की फसल व पशुओं का बचाव करें किसान

Updated at : 20 Dec 2017 2:16 AM (IST)
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बढ़ती ठंड से आलू की फसल व पशुओं का बचाव करें किसान

अगात की गयी गेहूं की फसल में 21 से 25 दिन के अंदर अवश्य करें सिंचाई शिवहर : कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ रामनिवास सिंह व कृषि वैज्ञानिक डॉ रेयाज अहमद ने बताया कि बढ़ते ठंड से आलू की फसल व पशुओं का बचाव जरूरी है. कहा कि आलू की फसल में झुलसा रोग […]

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अगात की गयी गेहूं की फसल में 21 से 25 दिन के अंदर अवश्य करें सिंचाई

शिवहर : कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ रामनिवास सिंह व कृषि वैज्ञानिक डॉ रेयाज अहमद ने बताया कि बढ़ते ठंड से आलू की फसल व पशुओं का बचाव जरूरी है.
कहा कि आलू की फसल में झुलसा रोग से बचाव के लिए मैंकोजेव 75 प्रतिशत डब्लू पी नामक फंफूदनाशी का तीन ग्राम दवा प्रतिलीटर पानी की दर से घोलकर खड़ी फसल पर छिड़काव करना चाहिए. कहा कि बढ़ते ठंड के कारण अगर आलू की फसल में रोग की लक्षण दिखाई पड़ने लगे तो मैंकोजेव के साथ मेटलक्जिल (64:8) नामक फंफूदनाशी का 2.5 ग्राम दवा प्रतिलीटर पानी की दर से घोल कर खड़ी फसल पर छिड़काव किया जा सकता है.
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा डॉ आरपीसीएयू पूसा समस्तीपुर एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी पूर्वानुमान के अनुसार फिलहाल सापेक्ष आर्द्रता सुबह में करीब 85 से 90 प्रतिशत व दोपहर में 45 से 55 प्रतिशत रहने का अनुमान है. कहा कि पांच सेंटीमीटर की गहराई पर भूमि का औसत तापमान सुबह में 13.9 एवं दोपहर में 22.9 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम में बदलाव के मद्देनजर सुझाव देते हुए कहा कि आलू की फसल जो एक महीना से अधिक हो गया हो. उसमें सिंचाई अवश्य करें.
सिंचाई के बाद 30 किलोग्राम नेत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन करें. बैंगन की फसल को तना व फल छेदक कीट से बचाव के लिए ग्रसित तना एवं फलों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें. यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 48ईसी/ एक मिली लीटर प्रति चार लीटर पानी के दर से छिड़काव करना चाहिए. रवि फसल की चर्चा करते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि अगात बोयी गयी गेहूं की फसल जो 21-25 दिन की हो गयी है. उसमें तुरंत सिंचाई करना आवश्यक है. सिंचाई के तीन चार दिन के बाद उर्वरक की दूसरी मात्रा डालनी चाहिए. वही गेहूं की विलंब से बोयी जाने वाली प्रभेद की बुआई भी करते रहना जरूरी है.
बुआई के लिए पीबीडब्लू 373,एचडी 2285,एचडब्लू 2045, एचयूडब्लू 234,डब्लूआर 544,डीबीडब्लू 14, एचडी2643( गंगा) एनडब्लू 2036, एचडी2967 आदि प्रभेद अनुशंसित है. कहा कि तना व शीर्ष छेदक कीट से बचाव के लिए रबी मक्का के गाभा में कार्बोफयूराडान 3 जी दानेदार दवा 3 से 4 दाने प्रति पौधा देना सुनिश्चित करना चाहिए.
कहा कि ठंढ़ के दौरान फूलगोभी व पत्ता गोभी फसल में पत्ती खाने वाली कीट से रोकथाम हेतु स्पेनोसेड दवा एक मिली लीटर प्रति तीन लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. अच्छे परिणाम के लिए एक मिली लीटर गोंद प्रतिलीटर पानी में डालना चाहिए. कहा कि ठंढ़ पशुओं के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है. पशुपालक किसान खुरपका, मुंहपका रोग से बचाव के लिए गाय एवं भैंसों का टीकाकरण अवश्य करा लें. डेगनाला बीमारी से बचाव के लिए गाय एवं भैंसों के बछड़ा को धान के पुआल को सुखाकर खिलाएं. फफूंदी लगे धान का पुआल कभी भी गाय या भैंस के बछड़ा को नहीं खिलाएं. प्रत्येक व्यस्क को 50 ग्राम व बछड़ों को प्रतिदिन 20 ग्राम मिनरल मिक्चर देना सुनिश्चित करें.
गाय व भैंस के बछड़ों को सूखे धान का पुआल खिलाएं
मौसम को लेकर पशुओं में खुरपक्का व मुंहपका रोग को लेकर बचाव के लिए टीकाकरण कराना जरूरी
पांच सेंटीमीटर की गहराई में भूमि का औसत तापमान है 13.9 व दोपहर में 22.9 डिग्री सेल्सियस
औसतन पांच से छह किलोमीटर की रफ्तार से चल रही है पछिआ हवा
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