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मातम की चादरों में लिपटा बछारपुर गांव

Updated at : 14 Sep 2017 5:06 AM (IST)
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मातम की चादरों में लिपटा बछारपुर गांव

पुपरी : मंगलवार को बछारपुर में हुए सड़क हादसे में गांव के तीन लोगों की मौत के बाद पूरा का पूरा गांव मातम की चादरों में लिपट गया है. मृतक के परिजनों के चीत्कार से गांव गमगीन है. लोग घटना को याद कर सिहर रहे है. खास कर हादसे में बाल-बाल बचे लोग घटना की […]

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पुपरी : मंगलवार को बछारपुर में हुए सड़क हादसे में गांव के तीन लोगों की मौत के बाद पूरा का पूरा गांव मातम की चादरों में लिपट गया है. मृतक के परिजनों के चीत्कार से गांव गमगीन है. लोग घटना को याद कर सिहर रहे है. खास कर हादसे में बाल-बाल बचे लोग घटना की भयावहता को बयां कर रहे है. बुधवार को गांव से एक साथ तीन लोगों का जनाजा उठा. परिजनों ने गांव के ही कब्रिस्तान में मृतकों को सुपूर्द ए खाक किया. बस हादसे में मृत मो जहीरूल उर्फ हीरा की मौत के बाद परिजन बदहवास है.

हीरा चिमनी में मजदूरी कर अपनी पत्नी शाहजहां व इकलौते पुत्र मो इब्राहिम की परवरिश करता था. महज 12 वर्ष की उम्र में ही इब्राहिम के सिर से पिता का साया उठ गया है. अब शाहजहां के सामने इकलौते पुत्र की परवरिश चुनौती बन गया है. बस हादसे में मृत नसीर अहमद उर्फ हीरा की मौत से परिजन टूट गये है. नसीर अहमद की मौत के बाद पत्नी समेत दस लोगों पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा है. नसीर अपने पीछे पत्नी के अलावा चार बेटी व 5 बेटा छोड़ गया है. उसके चार बेटे बिहार से बाहर अपना कारोबार करते हैं. सबसे छोटा पुत्र अमान (23वर्ष) घर पर रहता है. जबकि जहीर अहमद उर्फ मोती की पत्नी मवि मौलानागर उर्दू में हेडमास्टर है. मो मोती का इकलौता पुत्र अफजल अहमद दिल्ली में अपना कारोबार करता है. तीन बेटियों की वह शादी कर चुका है.

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