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कड़ाके की ठंड में पशुओं की सेहत पर खतरा, देखभाल से ही बचाव संभव

Updated at : 02 Jan 2026 4:16 PM (IST)
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कड़ाके की ठंड में पशुओं की सेहत पर खतरा, देखभाल से ही बचाव संभव

SASARAM NEWS.जैसे-जैसे ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है, मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं की परेशानी भी बढ़ती जा रही है. कड़ाके की ठंड और शीतलहर के दौरान पशुओं का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस मौसम में गाय, बैल, भैंस और बछड़ों पर ठंड का सीधा असर पड़ता है.

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शीतलहर में पशुपालक रहें सतर्क,संतुलित आहार और समय पर इलाज जरूरी

प्रतिनिधि, चेनारी जैसे-जैसे ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है, मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं की परेशानी भी बढ़ती जा रही है. कड़ाके की ठंड और शीतलहर के दौरान पशुओं का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस मौसम में गाय, बैल, भैंस और बछड़ों पर ठंड का सीधा असर पड़ता है. समय रहते सावधानी नहीं बरती गयी तो पशुओं में कई तरह की बीमारियां पनप सकती हैं, जिससे दूध उत्पादन घटता है और उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ठंड बढ़ने पर पशुओं के शरीर का तापमान कम हो जाता है, वे सुस्त पड़ जाते हैं और खाने-पीने में भी रुचि नहीं लेते. खासकर छोटे बछड़े, बूढ़े और कमजोर पशु जल्दी प्रभावित होते हैं. चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है. ठंड के कारण कई बार पशुओं के शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. यदि पौष्टिक चारे की समुचित व्यवस्था नहीं हो, तो पशुओं का शरीर कमजोर होने लगता है और वजन भी घटने लगता है. इसलिए विशेषज्ञ संतुलित आहार देने पर विशेष जोर देते हैं.

पशुओं को खुले में न रखें

पशुओं को खुले में नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित, गर्म और हवा से बचाव वाले शेड में रखा जाना चाहिए. शेड के अंदर जमीन पर सूखी पराली, भूसा या बोरा बिछाना जरूरी है, ताकि ठंड जमीन से शरीर तक न पहुंचे. शेड की छत और दीवारों से हवा या पानी अंदर न आये, इसका भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. सुबह और शाम पशुओं को हल्का गुनगुना पानी पिलाना बेहद लाभकारी होता है, इससे शरीर गर्म रहता है और ठंड का असर कम पड़ता है.

समय पर इलाज जरूरी

यदि पशु में खांसी, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी, दस्त, सुस्ती या शरीर में कंपकंपी जैसे लक्षण दिखें तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है. बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का प्रयोग नुकसानदायक साबित हो सकता है.

क्या कहते हैं पशु डॉक्टर

पशु चिकित्सक संजय सिंह का कहना है कि सर्दी के मौसम में पशुओं को पौष्टिक आहार देना बहुत जरूरी है. चारे के साथ गुड़, गली, चोकर और मिनरल मिक्सचर दिया जाना चाहिए. साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच भी करानी चाहिए, ताकि पशु पूरे मौसम में स्वस्थ बने रहें. ठंड के इस मौसम में थोड़ी सी सावधानी और देखभाल पशुओं की जान बचा सकती है और उन्हें स्वस्थ रख सकती है. पशुपालकों को चाहिए कि वे सजग रहें और समय पर आवश्यक कदम उठाकर पशुओं को ठंड से बचाएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG SHARAN

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By ANURAG SHARAN

ANURAG SHARAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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