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Sasaram News : रक्षाबंधन का पर्व आज, भाई की कलाई पर सजेगी प्यार की डोर

Updated at : 08 Aug 2025 9:16 PM (IST)
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Sasaram News : रक्षाबंधन का पर्व आज, भाई की कलाई पर सजेगी प्यार की डोर

भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व शनिवार को मनाया जायेगा. बहनें भाइयों की कलाइयों पर प्रेम की राखियां बांधकर उनके दीर्घायु होने की कामना करेंगी.

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सासाराम ग्रामीण. भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व शनिवार को मनाया जायेगा. बहनें भाइयों की कलाइयों पर प्रेम की राखियां बांधकर उनके दीर्घायु होने की कामना करेंगी. भाई बहनों की सुरक्षा का संकल्प लेंगे. बाजार पर त्योहार का रंग दिखा. सड़क किनारे सजी रंग-बिरंगी राखी की दुकानों पर देर रात तक खरीदारी होती रही. त्योहार का असर सराफा बाजार पर भी देखने को मिला. शुक्रवार को बाजार में चांदी के गणेश-लक्ष्मी की आकृति के साथ कई अन्य डिजाइन की राखियों की खूब बिक्री हुई. डोरेमान, छोटा भीम व मोटू-पतलू की कार्टून वाली राखियां बच्चों को लुभाती रहीं. म्यूजिकल राखी से लेकर रेशमी धागे तक दुकानों पर लोगों ने पसंद किये. इस बार एक रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक की राखी बाजार में उपलब्ध रही. त्योहार का रंग पूरे दिन बाजार पर दिखा. रक्षाबंधन त्योहार को लेकर मिष्ठान व उपहार की दुकानों पर भी भीड़ देखने को मिली. बहनें भाई की कलाई पर सजाने के लिए खूबसूरत राखी ढूंढ़ती दिखीं, तो भाई बहनों के लिए सबसे अच्छा उपहार खोजते देखे गये. त्योहार का मिठास बढ़ाने के लिए मिठाई की दुकानों पर अलग-अलग प्रकार के मिष्ठान उपलब्ध हैं. रक्षाबंधन को लेकर आचार्य दयाशंकर पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन पर राहुकाल सुबह 9 बजकर 07 मिनट से शुरू होगा. यह सुबह के 10 बजकर 47 मिनट तक बना रहेगा. इसलिए इस बीच भाई को राखी बांधने से बचें. राहुकाल में गृह प्रवेश, मुंडन, शुभ काम, यात्रा और खरीदारी जैसे कार्यों को करने से बचना चाहिए. इससे समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इस साल राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू हो रहा है, जो दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. अब चूंकि सुबह के 9 बजकर 7 मिनट से लेकर 10 बजकर 47 मिनट तक राहुकाल रहेगा, इसलिए आप इस समय को छोड़कर अन्य अवधि में अपने भाई को राखी बांध सकती हैं. व्यस्तता के कारण रक्षाबंधन मनाने का बदलता स्वरूप – रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है. लेकिन, जैसे-जैसे जीवन में जिम्मेदारियां बढ़ती चली जाती है. उस तरह त्योहार मनाने का स्वरूप बदल जाता है. पहले हम लोग रक्षाबंधन को ले एक सप्ताह पूर्व से ही तैयारी में जुट जाते थे. लेकिन, अब नौकरी में आने से भाई को पोस्टल से राखी भेजनी पड़ती है. – वंदना मिश्रा, एसडीपीओ-दो, डेहरी. – शादी से पूर्व हम लोग भाई के लिए बाजार से तरह-तरह की राखियों का कलेक्शन जुटाने में लग जाते थे. लेकिन, अब पारिवारिक दायित्व के कारण उस तरह की तैयारी रक्षाबंधन के लिए नहीं हो पा रहा है. लेकिन, उसी में मैनेज कर रक्षाबंधन मनाया जायेगा. –प्रिया कुमारी, गृहिणी. – शादी के बाद मेरा यह पहला राखी का त्योहार है. पहले अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए तरह-तरह की राखियों की खरीदारी करती थी. लेकिन, शादी के बाद कुछ मर्यादा में रहना होता है. लेकिन, इस बार भी राखी का त्योहार उसी जुनून से मनाऊंगी. – पूजा कुमारी, गृहिणी. – जब से नौकरी में आयी, तब से रक्षाबंधन के लिए भाई को राखी बांधने की छुट्टी नहीं मिलती है. अभी भी रक्षाबंधन को ले जुनून कम नहीं हुआ है. लेकिन, जीवन में बदलते परिवेश व व्यस्तता से उस उमंग से राखी का त्योहार राखी भेज कर मनाना पड़ता है. – डॉ पुष्पा कुमारी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRABHANJAY KUMAR

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By PRABHANJAY KUMAR

PRABHANJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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