रोहतास: बिक्रमगंज में काव नदी किनारे वर्षों पुराने शिव मंदिर के कायाकल्प की पहल, युवाओं ने संभाली कमान

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मंदिर की तस्वीर संवारने की कवायत करते समाजसेवियों की तस्वीर

बिक्रमगंज के काव नदी किनारे स्थित वर्षों पुराने शिव मंदिर को संवारने के लिए युवाओं ने बीड़ा उठाया है. लंबे समय से उपेक्षित इस मंदिर को अब नया रूप दिया जा रहा है. यह पहल न केवल धार्मिक स्थल का जीर्णोद्धार कर रही है, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही है.

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Rohtas News: बिक्रमगंज थाना चौक के समीप काव नदी के मुहाने पर स्थित वर्षों पुराने शिव मंदिर की तस्वीर अब बदलने लगी है. लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े इस मंदिर के आसपास कूड़ा-कचरा फेंके जाने और साफ-सफाई के अभाव में धार्मिक स्थल उपेक्षित नजर आता था. अब नगर के कुछ युवाओं की सकारात्मक सोच से मंदिर के कायाकल्प की पहल शुरू हुई है.

मंदिर की साफ-सफाई के साथ सावन के पवित्र महीने में रंग-रोगन का कार्य कराया जा रहा है. स्थानीय लोगों के सहयोग से परिसर को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है. इस पहल में नगर के समाजसेवी घनश्याम सिंह की भूमिका अहम देखी जा रही है.

पूजा स्थल के साथ नगर की पहचान बनाने की सोच

समाजसेवी घनश्याम सिंह ने बताया कि मंदिर को सिर्फ पूजा स्थल के रूप में नहीं, बल्कि नगर की एक सुंदर और आकर्षक पहचान के रूप में विकसित करने की सोच है. उन्होंने बताया कि मंदिर के आसपास फैली गंदगी को हटाकर स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में वन विभाग के सहयोग से परिसर में फल-फूल वाले पौधे लगाए जाएंगे. इससे मंदिर परिसर हरा-भरा होने के साथ श्रद्धालुओं के लिए भी बेहतर वातावरण तैयार होगा.

काव नदी किनारे विकसित हो सकता है आकर्षण का केंद्र

काव नदी के मुहाने पर मंदिर का स्थित होना इसकी खूबसूरती को और खास बनाता है. यदि मंदिर परिसर को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए और नदी किनारे स्वच्छ एवं हरित वातावरण तैयार हो, तो यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ नगरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन सकता है. शाम के समय नदी के किनारे मंदिर का दृश्य शहर की खूबसूरती में चार चांद लगा सकता है.

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

युवाओं की यह पहल केवल एक पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्थलों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी की नई सोच को भी सामने ला रही है. लोगों को उम्मीद है कि सामूहिक सहयोग से आने वाले दिनों में यह उपेक्षित मंदिर बिक्रमगंज की धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता की एक नई पहचान बनेगा.


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संतोष चंद्रकांत

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By संतोष चंद्रकांत

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