शेरशाह सूरी मकबरा की जर्जर चहारदीवारी बनी खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

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कभी भी गिर सकती है शेरशाह सूरी मकबरा परिसर की चारदीवारी, जमीन खिसकी

शेरशाह सूरी मकबरा परिसर के पश्चिमी छोर पर क्षतिग्रस्त चहारदीवारी व धंसी जमीन

Sasaram News : शेरशाह सूरी मकबरा परिसर की पश्चिमी चहारदीवारी जर्जर होकर हादसे का सबब बन रही है. दीवार के नीचे की मिट्टी खिसकने से आधार कमजोर हो गया है, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में है. स्थानीय लोगों ने तत्काल मरम्मत की मांग की है.

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Sasaram News : ऐतिहासिक शेरशाह सूरी मकबरा परिसर के पश्चिमी छोर पर इनलेट नहर के ऊपर बनी चहारदीवारी जर्जर होकर हादसे को आमंत्रण दे रही है. दीवार के नीचे की जमीन कई स्थानों पर खिसक चुकी है, जिससे उसका आधार कमजोर हो गया है. दीवार में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं और कई जगह प्लास्टर व ईंटें भी उखड़ चुकी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

दीवार के नीचे की मिट्टी खिसकी, आधार हुआ कमजोर

स्थल पर देखने से स्पष्ट होता है कि चहारदीवारी के नीचे की मिट्टी का कटाव हो चुका है. कई स्थानों पर दीवार का आधार हवा में लटका हुआ दिखाई देता है. वहीं, दीवार के पिलरों में भी दरारें पड़ गई हैं और किनारे का फर्श धंसने लगा है. इससे साफ है कि लंबे समय से इस हिस्से की मरम्मत और रखरखाव नहीं किया गया है.

पर्यटकों और राहगीरों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

शेरशाह सूरी मकबरा जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक, स्थानीय लोग और मॉर्निंग-ईवनिंग वॉक करने वाले लोग पहुंचते हैं. क्षतिग्रस्त चहारदीवारी के समीप से लोगों और वाहनों का लगातार आवागमन होता है. ऐसे में दीवार का कमजोर हिस्सा कभी भी गिर सकता है, जिससे जान-माल के नुकसान की आशंका बनी हुई है.

स्थानीय लोगों ने एएसआई और प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि चहारदीवारी की यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उनका कहना है कि ऐतिहासिक धरोहर होने के कारण इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

घेराबंदी और स्थायी मरम्मत की उठी मांग

स्थानीय लोगों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और जिला प्रशासन से मांग की है कि दुर्घटना की आशंका को देखते हुए सबसे पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की घेराबंदी कर लोगों की आवाजाही नियंत्रित की जाए. इसके बाद तकनीकी जांच कराकर चहारदीवारी की स्थायी मरम्मत कराई जाए. साथ ही पूर्व में क्षतिग्रस्त हो चुके हिस्सों की भी मरम्मत कर पूरी चहारदीवारी को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके.

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