काराकाट सहयोग शिविर में 128 आवेदनों का हुआ निष्पादन, एसपी ने कहा: सड़क हादसों में एक साल में 400 मौतें चिंताजनक

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 02 Jun 2026 8:57 PM

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शिविर की शुरुआत करते अधिकारी

Sasaram News: रोहतास के काराकाट में मंगलवार को आयोजित सहयोग सहायता शिविर में कुल 128 आवेदनों का शत-प्रतिशत निपटारा किया गया, जिसका डीएम उदिता सिंह और एसपी रौशन कुमार ने उद्घाटन किया. शिविर में विभिन्न विभागों की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ बांटे गए. डीएम ने राजस्व विभाग के केवल 7 आवेदन आने पर नाराजगी जताते हुए प्रचार-प्रसार बढ़ाने की बात कही. वहीं, एसपी रौशन कुमार ने सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए बताया कि एक साल में 400 लोगों की मौत से ढाई हजार परिवार बर्बाद हुए हैं, इसलिए लोग नाबालिगों को गाड़ी न दें और हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें.

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Sasaram News (अशोक कुमार सिंह): रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड अंतर्गत काराकाट पंचायत सरकार भवन परिसर में मंगलवार, 2 जून 2026 को आम जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए ‘सहयोग सहायता शिविर’ का आयोजन किया गया. इस भव्य शिविर का विधिवत उद्घाटन जिलाधिकारी (DM) उदिता सिंह, पुलिस अधीक्षक (SP) रौशन कुमार और मुखिया संघ के जिलाध्यक्ष सह स्थानीय मुखिया योगेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. मुखिया योगेंद्र सिंह ने जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों का स्वागत पौधा और फूलों का गुलदस्ता भेंट कर किया.

जिलाधिकारी के आगमन से पूर्व, बिहार सरकार के नगर विकास सह आवास विभाग के सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी ने शिविर में लगे विभिन्न स्टॉलों का औचक निरीक्षण किया. उन्होंने वहां प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों और कर्मियों से आवेदनों की प्रक्रिया और ऑन-द-स्पॉट समाधान को लेकर विस्तृत पूछताछ की, जिससे वे पूरी तरह संतुष्ट नजर आए.

मंच से लाभार्थियों के बीच किया गया योजनाओं का सीधा वितरण

शिविर के दौरान विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को मंच से सीधे लाभान्वित किया गया. डीएम और एसपी ने संयुक्त रूप से सरकारी लाभों का वितरण किया. स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के तहत दो वृद्धों को पेंशन स्वीकृति पत्र दिया गया. आईसीडीएस (ICDS) विभाग की ओर से दो गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म पूरी की गई, जबकि कृषि विभाग द्वारा दो किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया गया. श्रम विभाग की ओर से चार श्रमिकों को ई-श्रम कार्ड, जबकि आपूर्ति विभाग द्वारा चार नए परिवारों को राशन कार्ड सौंपे गए. ग्रामीण विकास की ओर से दो आवास योजना के लाभुकों को स्वीकृति पत्र और मनरेगा के तहत चार मजदूरों को जॉब कार्ड दिए गए. इसके अलावा 9 लोगों को जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया. शिक्षा विभाग की ओर से दो छात्राओं को प्रशस्ति पत्र दिया गया. साथ ही, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की परीक्षा में राज्य के टॉप-10 में नौवां स्थान हासिल करने वाले स्थानीय छात्र को मंच पर विशेष रूप से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.

128 आवेदनों के शत-प्रतिशत निष्पादन पर दी बधाई, लेकिन राजस्व के मात्र 7 मामलों पर भड़कीं डीएम

शिविर को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी उदिता सिंह ने कहा कि सहयोग शिविर बिहार सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी और जन-केंद्रित योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता को किसी भी काम या सुविधा के लिए जिला या अनुमंडल मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि प्रशासन खुद पंचायत में आकर काम करेगा.

डीएम ने खुशी जताते हुए कहा कि शिविर में कुल 128 आवेदन प्राप्त हुए और सभी का शत-प्रतिशत निष्पादन कर दिया गया, जो सराहनीय है. हालांकि, उन्होंने राजस्व विभाग (भूमि सुधार/दाखिल-खारिज) के काउंटरों पर केवल 7 आवेदन मिलने पर गंभीर आपत्ति और चिंता जताई. डीएम ने कहा, “राजस्व विभाग में जमीन से जुड़े कई प्रकार के कार्य होते हैं, लेकिन सिर्फ सात आवेदनों का आना यह दर्शाता है कि या तो लोग आवेदन नहीं दे रहे हैं या फिर इस शिविर का उचित प्रचार-प्रसार नहीं हुआ है.” उन्होंने मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया) से अपील की कि वे इन शिविरों का व्यापक प्रचार करें. उन्होंने बताया कि शिविर लगने से 30 दिन पहले से ही पंचायतों में आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और 30 दिनों के भीतर उनका निष्पादन करना प्रशासन की प्राथमिकता है.

सड़क हादसों में 1 साल में 400 मौतें, ढाई हजार परिवार हुए बर्बाद: एसपी रौशन कुमार

पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने जन जागरूकता के तहत मंच से बेतहाशा बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, “सड़क हादसों में हो रही मौतों के लिए सिर्फ पुलिस प्रशासन जिम्मेदार नहीं है, बल्कि कहीं न कहीं दोषी आप भी हैं. माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों को बिना ड्राइविंग लाइसेंस के मोटरसाइकिल थमा देते हैं, और जब घर पर शव आता है, तो उसकी पीड़ा क्या होती है, यह सभी जानते हैं.”

एसपी ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कारण प्रतिदिन औसतन 5 से 6 लोगों की मौत हो रही है. मरने वाले अधिकांश लोग अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य, बेटे, भाई या पति होते हैं. पिछले एक साल में कुल 400 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है. इस वजह से रोहतास के करीब ढाई हजार लोग (आश्रित परिवार) पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं. जो लोग गंभीर रूप से घायल हुए, उनके परिवारों ने इलाज के लिए अपने घर-जमीन बेच दिए या भारी कर्ज के जाल में फंस गए.

एसपी ने सख्त लहजे में कहा कि लोग अक्सर एक बाइक पर तीन से चार सवारी बैठाकर बिना हेलमेट बेतरतीब स्पीड से चलते हैं. जब पुलिस या परिवहन विभाग उन्हें टोकता है, तो वे कहते हैं कि बेवजह परेशान किया जा रहा है, जबकि पुलिस यह कदम आपकी ही सुरक्षा के लिए उठाती है. उन्होंने जनता से अपने प्रियजनों के जीवन की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करने में सहयोग मांगा.

इस महत्वपूर्ण सहयोग शिविर में रोहतास के सिविल सर्जन डॉ. मणि रंजन राज, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) राहुल कुमार सिंह, अंचल अधिकारी (CO) रितेश कुमार, बीपीआरओ रेणुका कुमारी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO) देवाशीष सिंह, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) मनोज कुमार, राजस्व अधिकारी (RO) ध्रुव कुमार, बिजली विभाग के SDO राज कुमार, एमओ राहुल कुमार और कल्याण पदाधिकारी शिवानी गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के जिला व प्रखंड स्तरीय कर्मी मौजूद रहे.

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