मौत का रास्ता बना 'चाचरपुल', 14 वर्षीय आर्चना की मौत के बाद भी जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर ग्रामीण

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मौत के चाचर पुल का इस्तेमाल करना महाराजगंज के ग्रामीणों की मजबूरी

खतरनाक चचरी पुल पार करते स्कूली बच्चे

Sasaram News : रोहतास के सिसरित गांव में आज भी एक खतरनाक चाचरपुल ग्रामीणों की जिंदगी का सहारा है, जो कई जानें ले चुका है. 14 वर्षीय आर्चना कुमारी की हालिया मौत ने इस पुल की भयावहता को फिर उजागर किया है. एकमात्र रास्ता होने के कारण ग्रामीण हर रोज जान जोखिम में डाल रहे हैं.

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Sasaram News : रोहतास जिले के नोखा प्रखंड अंतर्गत सिसरित गांव के लोगों की जिंदगी आज भी एक ऐसे खतरनाक चाचरपुल के सहारे चल रही है, जो कई लोगों की जान ले चुका है. हाल ही में 14 वर्षीय आर्चना कुमारी की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर इस पुल की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है. इसके बावजूद ग्रामीणों के पास इसी रास्ते से आने-जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

चाचरपुल से फिसलकर नहर में गिरी थी आर्चना

सिसरित गांव निवासी 14 वर्षीय आर्चना कुमारी 21 सितंबर 2025 की सुबह नोखा से अपने घर लौट रही थी. घर पहुंचने के लिए उसे महाराजगंज टोला के समीप बक्सर-चौसा नहर पर बने चाचरपुल को पार करना था. इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह नहर में गिर पड़ी. नहर में पानी का तेज बहाव उसे करीब पांच किलोमीटर दूर तक बहा ले गया. अगले दिन सुबह करीब सात बजे दिनारा प्रखंड के भानस ओपी क्षेत्र स्थित कुंड गांव के पास नहर से उसका शव बरामद किया गया. इस घटना के बाद परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक का माहौल है.

एक ही रास्ता होने से खतरा उठाने को मजबूर हैं ग्रामीण

आर्चना की मौत के अगले ही दिन ग्रामीण, बच्चे और छात्र-छात्राएं फिर उसी चाचरपुल से होकर नोखा बाजार, स्कूल और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने लगे. ग्रामीणों का कहना है कि सिसरित टोला और महाराजगंज टोला को जोड़ने वाला यही एकमात्र रास्ता है. ऐसे में जान का जोखिम उठाना उनकी मजबूरी बन गया है.

अब तक आधा दर्जन लोगों की जा चुकी है जान

महाराजगंज टोला निवासी चंदेश्वर सिंह ने बताया कि जब टोला में केवल पांच घर थे, तब ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से नहर पर चाचरपुल बनाया था. बाद में वर्ष 2000 के आसपास बढ़ती आबादी को देखते हुए लोहे से बने चाचरपुल का निर्माण कराया गया. उन्होंने बताया कि वर्तमान में टोला में करीब 400 मतदाता और लगभग 700 की आबादी है. इसके बावजूद आज तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका. उनकी याद के अनुसार, बरसात के दिनों में इस चाचरपुल से गिरकर अब तक आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है.

ग्रामीण बोले- कई बार की मांग, फिर भी नहीं बनी सड़क

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सड़क और पुल निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. पूनम देवी ने कहा कि चुनाव के समय नेता गांव में वोट मांगने आते हैं, लेकिन सड़क निर्माण की मांग पर कोई ध्यान नहीं देता. धर्मराज सिंह ने बताया कि बरसात के दिनों में नहर का तेज बहाव हमेशा हादसे का डर पैदा करता है. उनका कहना है कि यदि सरकार पुल का निर्माण करा दे तो ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी. सहोदरा कुंवर ने कहा कि रात में किसी की तबीयत खराब हो जाए तो मरीज को खाट पर उठाकर नहर पार करानी पड़ती है. इसके बाद ही वाहन से अस्पताल ले जाना संभव हो पाता है. मनोज कुमार ने कहा कि सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने की बात करती है, लेकिन आज तक उनके गांव तक सुरक्षित सड़क और पुल नहीं बन पाया. मुकेश कुमार ने बताया कि चाचरपुल खतरनाक है, यह सभी जानते हैं. इसके बावजूद कोई दूसरा रास्ता नहीं होने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर पैदल और बाइक से इसे पार करते हैं. चंदेश्वर सिंह ने कहा कि सात निश्चय योजना के तहत गांव के भीतर सड़क और नाली का निर्माण हुआ है, लेकिन गांव से बाहर निकलने के लिए आज भी सुरक्षित सड़क और पुल की सुविधा नहीं है. ग्रामीण अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी इस वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान करेगी.

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