कर्म और संस्कार ही जीवन व राष्ट्र की असली धरोहर-जियर स्वामी

कर्म और संस्कार ही जीवन व राष्ट्र की असली धरोहर-जियर स्वामी
फोटो-12- श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के प्रथम दिन प्रवचन देते जियर स्वामी जी महाराज करगहर के मथुरापुर में लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का शुभारंभ जियर स्वामी जी ने कर्म, संस्कार और प्रकृति पूजा पर दिया प्रवचन प्रतिनिधि, करगहर कर्मठ व्यक्ति को ही भाग्य साथ देता है. जो व्यक्ति केवल भाग्य के भरोसे जीता है, उसके जीवन में कभी सुख प्राप्त नहीं होता है. आलसी व्यक्ति को देखकर भाग्य भी उससे दूर हो जाता है. यह बातें प्रखंड क्षेत्र के मथुरापुर गांव में बुधवार को आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के प्रथम दिन लक्ष्मी प्रपन्ना जियर स्वामी जी ने अपने प्रवचन में कहीं. उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के आधार पर ही सुख और दुख की प्राप्ति होती है. मर्यादा और संस्कार राष्ट्र की धरोहर और पहचान हैं. परिवार, समाज और राष्ट्र का उत्थान बिना मर्यादा और संस्कार के संभव नहीं है. वर्तमान समय में मर्यादा और संस्कार में कमी को देखते हुए उन्होंने कहा कि इसके कारण समाज में कटुता बढ़ती जा रही है. छोटे-छोटे बच्चों को प्रारंभ से ही संस्कार और मर्यादा सिखाना चाहिए, तभी राष्ट्र का कल्याण संभव है. बच्चों को बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर प्रणाम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए, जिससे वे आगे चलकर विनम्र और आज्ञाकारी बनें. उन्होंने कहा कि एक नारा दिया जाता है कि अधर्म का नाश हो, लेकिन वास्तव में अधर्म का पूर्ण नाश संभव नहीं है, क्योंकि ब्रह्मा के छाती से धर्म और पीठ से अधर्म का जन्म हुआ है. इसलिए धर्म और अधर्म को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता है. स्वामी जी ने कहा कि विद्वान की महत्ता तभी होती है जब समाज में अशिक्षित लोग हों. प्रकृति की पूजा अनादिकाल से चली आ रही है. प्रकृति प्रदत्त जिन वस्तुओं से जीव का कल्याण होता है, वही देवता कहलाते हैं. इसका उल्लेख वेद, पुराण और उपनिषदों में भी मिलता है. उन्होंने कहा कि पहाड़, वृक्ष, नदी, वायु, सूर्य और चंद्रमा आदि की पूजा की परंपरा इसलिए है, क्योंकि ये सभी हमारे जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी हैं.
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