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मुसहरों के मसीहा हीरालाल सेठ की याद में उठे सवाल

Updated at : 13 Apr 2025 6:29 PM (IST)
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मुसहरों के मसीहा हीरालाल सेठ की याद में उठे सवाल

Sasaram news. 2001 में जब बिहार सरकार ने पहली बार पंचायती राज चुनाव कराया, तो जमोढी पंचायत में एक खास उम्मीदवार बिक्रमगंज के प्रसिद्ध स्वर्ण व्यवसायी हीरालाल प्रसाद सेठ ने सब का ध्यान खींचा था.

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चबूतरे पर विवाद. पुराने काम पर लगा दिया गया नये निर्माण का बोर्ड

जमोढी पंचायत में घोटाला या विरासत से बेईमानी? फोटो-17- नीम के पेड़ तले चबूतरे और लगा पंचायत का बोर्ड. ए- हीरालाल सेठ का फाइल फोटो. प्रतिनिधि, बिक्रमगंज.2001 में जब बिहार सरकार ने पहली बार पंचायती राज चुनाव कराया, तो जमोढी पंचायत में एक खास उम्मीदवार बिक्रमगंज के प्रसिद्ध स्वर्ण व्यवसायी हीरालाल प्रसाद सेठ ने सब का ध्यान खींचा था. हालांकि वह मुखिया का चुनाव हार गये, लेकिन उन्होंने जो वादा किया था, उसे निभाया. बिसेनियां बाल की दलित बस्ती में उन्होंने अपने खर्च से एक बड़ा चबूतरा बनवाया, दो चापाकल लगवाये और पुराने कुएं का जीर्णोद्धार कराया. यह कार्य समाजसेवा का अद्भुत उदाहरण बन गया. हीरालाल सेठ ने फिर कभी चुनाव नहीं लड़ा, न ही उनके परिवार से किसी ने राजनीतिक दखल दिया. लेकिन, मुसहर समुदाय के लोगों रायजी मुसहर, कुंज मुसहर, मुसा, सिपाही, हीरा और पुलिस मुसहर ने उन्हें अब तक नहीं भुलाया. 19 जुलाई 2008 को जब उनका निधन हुआ, तो बिसेनियां बाल के सभी मुसहर परिवारों में चूल्हा नहीं जला. अब भी उनके पुत्र मदन प्रसाद वैश्य सहित परिवार के अन्य सदस्य इस समुदाय के प्रति करुण भाव रखते हैं. मगर अब इस चबूतरे पर विवाद खड़ा हो गया है. फरवरी 2025 में वर्तमान मुखिया मनोज कुमार के नाम का बोर्ड चबूतरे पर लगाया गया, जिसमें लिखा है कि यह निर्माण कार्य छठे वित्त आयोग की योजना वित्तीय वर्ष 2022/23 के तहत 1,21,443 रुपये की लागत से किया गया. इस योजना के अभिकर्ता पंचायत सचिव रक्षक रंजन हैं.

मुखिया द्वारा फरवरी 2025 में लगवाये गये इस बोर्ड पर मुसहर समाज ने इसका कड़ा विरोध किया है. उनका आरोप है कि चबूतरे को केवल प्लास्टर कर के उसका नाम और इतिहास मिटा दिया गया. रायजी मुसहर और अन्य लोगों ने बताया कि यह वही चबूतरा है, जिसे 2001 में हीरालाल सेठ ने बनवाया था. अब उस पर सरकारी पैसे से बोर्ड लगाकर गलत दावे किये जा रहे हैं. यह मामला सिर्फ एक निर्माण को लेकर नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति की सेवा भावना और विरासत के साथ धोखा है. इस मामले ने न केवल एक कथित घोटाले की ओर इशारा किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे किसी की कीर्ति को मिटाने की कोशिश की जा सकती है.

क्या कहते हैं अधिकारी

बीडीओ अमित प्रताप सिंह ने इस विषय पर कहा है कि यह गंभीर मामला है और इसकी जांच होगी. यदि कोई दोषी पाया गया, तो उस पर कार्रवाई की जायेगी. इस प्रकरण ने मुसहर समाज को झकझोर दिया है, जिन्होंने दशकों से हीरालाल सेठ को अपना मसीहा माना है. अब सवाल यह है कि क्या एक नेक कार्य को सियासी फायदे के लिए मिटा देना जायज़ है? जवाब जनता और प्रशासन दोनों को देना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG SHARAN

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By ANURAG SHARAN

ANURAG SHARAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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