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सदर अस्पताल परिसर में खड़ी रहने वाली निजी एंबुलेंस पर रोक, दलालों पर कसा शिकंजा

SASARAM NEWS.सदर अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी करने वालों की अब खैर नहीं है. जिलाधिकारी उदिता सिंह के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ मणिराज रंजन ने कार्रवाई शुरू की है.

डीएम ने सदर अस्पताल में खड़ी होने वाली निजी एंबुलेंस पर कार्रवाई का दिया था निर्देश

परिसर में खड़ी रहेंगी सिर्फ सरकारी एंबुलेंस

एसडीओ ने किया निरीक्षण, पूरे दिन नहीं दिखी निजी एंबुलेंस

सासाराम सदर.

सदर अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी करने वालों की अब खैर नहीं है. जिलाधिकारी उदिता सिंह के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ मणिराज रंजन ने कार्रवाई शुरू की है. सीएस का आदेश जारी होते ही निजी एंबुलेंस चालकों में हड़कंप मच गया है. इसी क्रम में शुक्रवार को सदर एसडीओ डॉ नेहा कुमारी ने सदर अस्पताल पहुंचकर एंबुलेंस की जांच की और अस्पताल प्रबंधन व चिकित्सकों को परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी करने पर सख्त रोक लगाने का निर्देश दिया. इसके बाद पूरे दिन सदर अस्पताल परिसर में एक भी निजी एंबुलेंस नजर नहीं आयी.मालूम हो कि शहर के कई निजी एंबुलेंस चालक अपने वाहन सदर अस्पताल परिसर में खड़े कर पूरे दिन ट्रॉमा सेंटर के आसपास डटे रहते थे. जैसे ही ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सक किसी गंभीर मरीज को हायर सेंटर के लिए रेफर करते थे, निजी एंबुलेंस चालक मरीज के परिजनों को वाराणसी के निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए कन्वेंस करने लगते थे. परिजन तैयार होते ही चालक उन्हें अपने पसंदीदा अस्पतालों में भर्ती करा देते थे. इसके एवज में वाराणसी के निजी अस्पतालों से एंबुलेंस चालकों को कमीशन के तौर पर मोटी रकम मिलती थी. इस पूरे मामले को लेकर कुछ लोगों ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने एसडीओ को कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाया.

निजी एंबुलेंस हटने से दलालों से मिलेगी निजातसदर अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी करने पर रोक लगने के बाद चालकों में नाराजगी देखी जा रही है. बताया जाता है कि सदर अस्पताल से रेफर होने वाले गंभीर मरीजों को पटना रेफर किया जाता है, जिनके लिए सरकार की ओर से मुफ्त एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध है. लेकिन, नजदीक होने के कारण कई मरीज वाराणसी जाना पसंद करते हैं, जहां निजी एंबुलेंस का सहारा लिया जाता है.इसी का लाभ उठाकर निजी एंबुलेंस चालक ट्रॉमा सेंटर और एमसीएच के आसपास अपने वाहन खड़े कर मरीजों के परिजनों के पीछे लग जाते थे और वाराणसी ले जाने के लिए प्रेरित करते थे. परिजन निजी एंबुलेंस से मरीजों को वाराणसी ले जाते थे. बताया जाता है कि वाराणसी के लगभग सभी निजी अस्पतालों में एंबुलेंस चालकों का कमीशन तय है. किसी भी निजी अस्पताल में मरीज पहुंचाने पर चालकों को मोटी कमाई होती थी.

कहते हैं अधिकारीसदर अस्पताल में बड़े पैमाने पर निजी एंबुलेंस चालकों द्वारा दलाली की शिकायत मिल रही थी. इसे देखते हुए यह कार्रवाई की गयी है. अब यदि परिसर में कोई भी निजी एंबुलेंस खड़ी पायी गयी, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

—डॉ मणिराज रंजन, सिविल सर्जन, रोहतास

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