Sarkari Naukri 2020 : बिहार में नौकरी की बहार, अंचलों में 2136 डाटा इंट्री ऑपरेटर होंगे नियुक्त

सरकार जमीन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और डिजिटाइज्ड दस्तावेज रैयतों की मुहैया कराने के लिए ' इ-धरती ' योजना जमीन पर उतरने जा रही है.
पटना. राज्य में लोगों को मामूली फीस पर जमीन के दस्तावेज अंचल में ही उपलब्ध होंगे. जमीन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और डिजिटाइज्ड दस्तावेज मामूली शुल्क लेकर रैयतों की मुहैया कराने के लिए मॉर्डन रिकॉर्ड रूम बनाने की ‘ इ-धरती ‘ योजना जमीन पर उतरने जा रही है.
राज्य में 534 अंचल हैं, जिनमें 436 अंचलों में दोमंजिली इमारत तैयार है. प्रत्येक एमआरआर पर चार डाटा इंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति के लिए फाइल कैबिनेट के पास भेज दी गयी है. मंजूरी मिलते ही 2136 डाटा इंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.
राष्ट्रीय भू-अभिलेख के आधुनिकीकरण कार्यक्रम यानी ‘इ-धरती’ के अंतर्गत 26 प्रकार के भू-अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाना है. इसके लिए प्रदेश के सभी गांवों के सर्वे खतियान, तहसील व पंजीयन कार्यालय को ऑनलाइन आपस में जोड़ना, मॉडर्न रिकॉर्ड रूम बनाना और भू-अभिलेखों जैसे नक्शा व बी-वन खसरा का कंप्यूटरीकरण किया जाना है.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य के सभी अंचलों में जल्द ही आधुनिक अभिलेखागार सह डाटा केंद्र (माॅडर्न रिकाॅर्ड रूम ) काम करना शुरू कर देगा. एमआरआर 2136 डाटा इंट्री ऑपरेटर का नियोजन बेल्ट्रॉन या अन्य एजेंसी के जरिये किया जायेगा.
मॉडर्न रिकाॅर्ड रूम का क्रियान्वयन कराने के लिए सभी जिलों में अपर समाहर्ता नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं. छह एमआरआर में फिनिशिंग का काम चल रहा है. 41 का काम अंतिम चरण में है. 23 अंचलों में टेंडर निकाला जा चुका है. 534 अंचलों में से 28 अंचल में जमीन की समस्या बनी है.
अपर मुख्य सचिव ने इसे दूर करने का आदेश दिया है. प्रत्येक केंद्र आठ कंप्यूटर, आठ सॉफ्टवेयर, चार बहुपयोगी प्रिंटर, दो स्कैनर, टेबुल, कुर्सी, आलमीरा आदि संसाधन से लैस होंगे. सभी जगह सीसीटीवी से निगरानी की जायेगी.
मॉडर्न रिकॉर्ड रूम को क्रियाशील बनाने के लिए कुल 195.59 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर उपकरण के लिए भू- अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय सभी डीएम को प्रति अंचल 20.10 लाख रुपये दे रहा है.
प्रथम चरण में 163 अंचलों के लिए 2624.30 लाख का आवंटन हो चुका है. ये 163 अंचल उन 436 अंचलों में शामिल हैं, जहां भवन निर्माण के लिए 30.65 लाख रुपये अलग से मिले हैं. रखरखाव पर सालाना 9.61 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह राशि राष्ट्रीय भू–अभिलेख एवं प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र सरकार दे रही है. राज्य सरकार का 50% योगदान देगी.
Posted by Ashish Jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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