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sonpur mela : लोक संस्कृति से है सोनपुर मेले की पहचान, गूंज रही है कजरी-झूमर की धुन

Updated at : 28 Nov 2024 9:22 PM (IST)
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sonpur mela : लोक संस्कृति से है सोनपुर मेले की पहचान, गूंज रही है कजरी-झूमर की धुन

Chhapra News : बीते कुछ सालों में कला संस्कृति व पर्यटन विभाग ने सोनपुर मेला के पुराने गौरव को वापस लौटाने को लेकर सकारात्मक प्रयास किया है. कल तक युवाओं की भीड़ को आकर्षित कर रहे थिएटर को अब सोनपुर मेला में बनाया गया सांस्कृतिक मंच मजबूती से चुनौती दे रहा है.

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छपरा. बीते कुछ सालों में कला संस्कृति व पर्यटन विभाग ने सोनपुर मेला के पुराने गौरव को वापस लौटाने को लेकर सकारात्मक प्रयास किया है. कल तक युवाओं की भीड़ को आकर्षित कर रहे थिएटर को अब सोनपुर मेला में बनाया गया सांस्कृतिक मंच मजबूती से चुनौती दे रहा है. पहले अधिकांश युवा शाम होते ही थिएटर के टिकट काउंटर पर कतारबद्ध हो जाते थे. लेकिन अब सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए उत्सुकता बढ़ी है. सांस्कृतिक मंच से लोक कलाओं के विभिन्न विधाओं की प्रस्तुति दी जा रही है. सारण ही नहीं बल्कि वैशाली, पटना, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, गया, सीवान, गोपालगंज, मोतिहारी, आरा आदि जिलों से भी कलाकार सोनपुर मेला में आकर गायन, नृत्य, वादन, नाटक आदि की प्रस्तुति दे रहे हैं. लोक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति व परंपराओं से अवगत होने का अवसर भी मिल रहा है. कजरी, झूमर, सोहर, एकांकी, वीरगाथा, पारंपरिक गीत, विवाह गीत, लोककवि भिखारी ठाकुर की रचनाएं, महेंद्र मिश्र की पूर्वी समेत सारण गाथा को सुनने का अवसर भी मेले में आये लोगों को मिल रहा है. प्रतिदिन दिवाकालीन व संध्याकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बनाये गये पंडाल में भारी भीड़ जुट रही है. वहीं दूसरी ओर बीते एक दशक में थिएटर देखने वालों की संख्या कम हुई है.

कुल छह थिएटर, फिर भी भीड़ कम

सोनपुर मेला में कुल छह थिएटर हैं. शोभा सम्राट थिएटर, इंडिया थिएटर, गुलाब विकास थिएटर सहित अन्य थिएटर का प्रचार भी जोर-शोर से किया गया है. लेकिन समय के साथ थिएटर संचालकों ने ट्रेंड नहीं बदला है. थिएटर में फूहड़ता परोसी जा रही है. जो कि अभी युवाओं के लिए सामान्य सी बात बनकर रह गयी है. ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में भी शिक्षा का स्तर बढ़ा है. जिस कारण अब थिएटर के प्रति उनका उत्साह कम हुआ है. थिएटर के प्रति उत्साह कम होने का दूसरा प्रमुख कारण यह भी है कि कला संस्कृति विभाग तथा पर्यटन विभाग द्वारा संध्याकालीन सत्र में प्रतिदिन बड़े नामचीन कलाकारों का कार्यक्रम मुख्य सांस्कृतिक मंच से आयोजित कराया जा रहा है. 30 नवंबर को चर्चित गायक कैलाश खेर की प्रस्तुति होनी है. जिसे लेकर युवा वर्ग अभी से ही उत्साहित है.

रामायण मंचन ने भी किया है आकर्षित

सोनपुर मेला में इस समय प्रतिदिन रामायण मंचन हो रहा है. जो मेले का प्रमुख आकर्षण बन गया है. स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले रामायण मंचन देखने के लिए ज्यादातर महिलाओं की भीड़ जुटती थी. लेकिन अब युवा वर्ग भी रामायण मंचन देखने के लिए उत्साहित है. कई यूट्यूबर भी रामायण मंचन की वीडियो बनाकर उसे प्रमोट कर रहे हैं. सोनपुर ही नहीं बल्कि पटना व हाजीपुर से भी संध्या में लोग रामायण मंचन देखने के लिए आ रहे हैं. यहां रामायण मंचन का हिस्सा बने कई स्तरीय कलाकार जीवंत प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को भाव विभोर कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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