रद्दी के टुकड़ों से देते हैं विचारों को आकृति

छपरा (नगर) : रंगों के साथ कला का चित्रण करते तो हमने कई कलाकारों को देखा है, पर छपरा शहर के 25 वर्षीय रविरंजन कुमार जब कागज के रद्दी टुकड़ों से अपने विचारों को आकृति देते हैं. महान चित्रकार पिकासो द्वारा इजाद किये गए ‘कोलाज’ तकनीक से प्रभावित होकर रविरंजन मॉर्डन कोलाज के फॉर्मूले से […]
छपरा (नगर) : रंगों के साथ कला का चित्रण करते तो हमने कई कलाकारों को देखा है, पर छपरा शहर के 25 वर्षीय रविरंजन कुमार जब कागज के रद्दी टुकड़ों से अपने विचारों को आकृति देते हैं. महान चित्रकार पिकासो द्वारा इजाद किये गए ‘कोलाज’ तकनीक से प्रभावित होकर रविरंजन मॉर्डन कोलाज के फॉर्मूले से चित्रकला को शानदार अंदाज से अभिव्यक्त कर रहे हैं. इनके बनाये कलाकृतियों में न सिर्फ वेराइटी दिखती है, बल्कि दूरदर्शिता भी झलकती है. निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले रविरंजन को पेंटिंग विरासत में मिली है. पिता चंद्रिका चौधरी छपरा के पुराने साइन बोर्ड पेंटर है.
बेहद कम आमदनी के बीच पिता ने जैसे-तैसे पूरे परिवार को संबल दिया है. हालांकि पिता ने बढ़ती उम्र के कारण अब साइन बोर्ड बनाने का काम बंद कर दिया है और परिवार के 5-6 लोगों की परवरिश का जिम्मा अब रविरंजन के कंधे पर है. एक छोटी सी नंबर प्लेट की दुकान के सहारे रविरंजन का परिवार चलता है. हालांकि संघर्ष को जीवन का आधार मानने वाले रविरंजन तमाम कठिनाइयों के बीच अनवरत चित्रकला के क्षेत्र में बेहतर करने के लिए आज भी प्रयासरत हैं.
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