गर्भवतियों की तीन बार होगी एचआइवी जांच

Published at :17 Feb 2017 12:13 AM (IST)
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गर्भवतियों की तीन बार होगी एचआइवी जांच

छपरा (सारण) : सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था से प्रसूति के दौरान (नौ महीने) अब प्रत्येक तीन महीने में एचआइवी जांच की जायेगी. अभी अस्पताल में प्रसूति कराने वाली गर्भवती महिलाओं की एक बार जांच की जाती है. पिछले एक दशक में यहां छह हजार एचआइवी संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है. […]

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छपरा (सारण) : सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था से प्रसूति के दौरान (नौ महीने) अब प्रत्येक तीन महीने में एचआइवी जांच की जायेगी. अभी अस्पताल में प्रसूति कराने वाली गर्भवती महिलाओं की एक बार जांच की जाती है. पिछले एक दशक में यहां छह हजार एचआइवी संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है. इनमें से करीब 2277 महिलाएं और 3222 पुरूष 277 बालक, 162 बालिका और 2 किन्नर इससे पीड़ित है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रयास के बावजूद जिले यह बीमारी गंभीर रूप लेते जा रहा है. एचआइवी महिला और उनके गर्भ में पल रहे नवजात में भी पनपने आशंका है. इस पर अंकुश लगाने के लिए एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने फरवरी के दूसरे सप्ताह से गर्भावस्था शुरू होने से प्रसूति होने तक प्रत्येक तीन महीनों पर जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से एचआइवी जांच होगी. विशेषज्ञों के अनुसार रक्त चढ़ाने, संक्रमित सूई का प्रयोग करने या किसी भी अन्य कारण से अगर एचआइवी का कीटाणु शरीर में प्रवेश करता है. इसके कीटाणू तीन महीने बाद सक्रिय होते हैं। जिसे विंडो पीरियड के नाम से जाना जाता है.

इस दौरान एचआइवी की जांच रिपोर्ट सही नहीं आती है. इसके मद्देनजर प्रत्येक तीन महीने पर जांच करने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने, ऑपरेशन के लिए आने वाले सभी मरीज का एचआईवी जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है.

मालूम हो कि अब तक इस रोग से पीड़ित 5941 मरीजों की पहचान की गयी है. गर्भवती महिलाओं में अब गर्भधारण से लेकर प्रसूति तक तीन बार एचआइवी जांच किया जायेगा. अगर किसी नवजात या महिला में यह बीमारी पाई जाती है उस पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
रोकथाम के लिए चल रहीं योजनाएं
ऑपरेशन से पहले सभी का एचआइवी जांच
गर्भवती महिलाओं की जांच
गुप्त रोगियों की जांच
अस्पताल में मरीजों की काउंसेलिंग
प्रयोग कर फेंकने वाले सूई का प्रयोग करना
एक सूई से कई लोगों द्वारा नशा लेना
सेक्स वर्कर को एड्स से बचाव के विषय में जानकारी मुहैया कराना
सेक्स वर्करों की पहचान करना
कॉलेज, निजी कंपनी व टारग्रेटेड ग्रुप को एड्स के प्रति जागरूक करना
रक्तदान करने के दौरान एचआइवी की जांच करना
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
एचआइवी लाइलाज बीमारी है. जागरूकता से ही रोक थाम और बचाव संभव है. समय रहते जांच कराकर इसका संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है. बचाव और सुरक्षा ही इसका बेहतर उपाय है.
डॉ नीला सिंह, प्रभारी महिला चिकित्सा पदाधिकारी, महिला रोग विभाग, सदर अस्पताल
एचआइवी संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से गर्भवती महिलाओं की तीन माह पर जांच कराने की व्यवस्था शुरू कर दी गयी है. संबंधित चिकित्सकों को सख्ती के साथ इसका पालन करने का निर्देश दिया गया है.
डॉ निर्मल कुमार, सिविल सर्जन, सारण
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