गर्भवतियों की तीन बार होगी एचआइवी जांच

छपरा (सारण) : सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था से प्रसूति के दौरान (नौ महीने) अब प्रत्येक तीन महीने में एचआइवी जांच की जायेगी. अभी अस्पताल में प्रसूति कराने वाली गर्भवती महिलाओं की एक बार जांच की जाती है. पिछले एक दशक में यहां छह हजार एचआइवी संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है. […]
छपरा (सारण) : सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था से प्रसूति के दौरान (नौ महीने) अब प्रत्येक तीन महीने में एचआइवी जांच की जायेगी. अभी अस्पताल में प्रसूति कराने वाली गर्भवती महिलाओं की एक बार जांच की जाती है. पिछले एक दशक में यहां छह हजार एचआइवी संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है. इनमें से करीब 2277 महिलाएं और 3222 पुरूष 277 बालक, 162 बालिका और 2 किन्नर इससे पीड़ित है.
स्वास्थ्य विभाग के प्रयास के बावजूद जिले यह बीमारी गंभीर रूप लेते जा रहा है. एचआइवी महिला और उनके गर्भ में पल रहे नवजात में भी पनपने आशंका है. इस पर अंकुश लगाने के लिए एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने फरवरी के दूसरे सप्ताह से गर्भावस्था शुरू होने से प्रसूति होने तक प्रत्येक तीन महीनों पर जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से एचआइवी जांच होगी. विशेषज्ञों के अनुसार रक्त चढ़ाने, संक्रमित सूई का प्रयोग करने या किसी भी अन्य कारण से अगर एचआइवी का कीटाणु शरीर में प्रवेश करता है. इसके कीटाणू तीन महीने बाद सक्रिय होते हैं। जिसे विंडो पीरियड के नाम से जाना जाता है.
इस दौरान एचआइवी की जांच रिपोर्ट सही नहीं आती है. इसके मद्देनजर प्रत्येक तीन महीने पर जांच करने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने, ऑपरेशन के लिए आने वाले सभी मरीज का एचआईवी जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है.
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