सारण की 89 वर्षीय बच्ची देवी का मरणोपरांत नेत्रदान, अंतिम इच्छा पूरी कर परिजनों ने पेश की मिसाल

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नेत्रदान के मौके पर मौजूद परिजन व संस्था के सदस्य | Prabhat Khabar Network

Saran Eye Donation: सारण की 89 वर्षीय बच्ची देवी का मरणोपरांत नेत्रदान कराया गया. दधीचि देहदान समिति और आईजीआईएमएस पटना के सहयोग से उनकी अंतिम इच्छा पूरी हुई. उनके कॉर्निया से किसी नेत्रहीन को नई रोशनी मिलेगी.

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Saran Eye Donation: महर्षि दधीचि की पावन धरती पर मानवता की सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला. दधीचि देहदान समिति के प्रयास से छपरा की 89 वर्षीय बच्ची देवी का मरणोपरांत नेत्रदान सफलतापूर्वक कराया गया. उनके कॉर्निया को आईजीआईएमएस, पटना के आई बैंक में सुरक्षित रखा गया है, जहां आवश्यक परीक्षण के बाद इसे किसी जरूरतमंद नेत्रहीन के प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किया जाएगा.

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मृत्यु के बाद भी किसी की आंखों की रोशनी बनना चाहती थीं बच्ची देवी

बच्ची देवी छपरा शहर के सामाजिक कार्यकर्ता धर्मनाथ पिंटू की माता एवं शिव बाजार निवासी दयानंद प्रसाद की धर्मपत्नी थीं. उनकी अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनके नेत्र दान किए जाएं, ताकि किसी नेत्रहीन व्यक्ति को नई रोशनी मिल सके.

परिजनों ने निभाई मां की अंतिम इच्छा

गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे श्रीनिवास मेडिकल कॉलेज में बच्ची देवी का निधन हो गया. निधन के तुरंत बाद परिजनों ने दधीचि देहदान समिति, छपरा के अध्यक्ष संजीव चौधरी, संयुक्त सचिव शैलेंद्र पुरी, मीडिया प्रभारी शशि शेखर सिंह कौशिक और कोषाध्यक्ष सतीश कुमार को सूचना दी. इसके बाद छपरा और पटना इकाई के समन्वय से नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई.

चारों बेटों ने पेश की मानवता की मिसाल

बच्ची देवी के चारों पुत्र—वैद्यनाथ प्रसाद, त्रिलोकीनाथ प्रसाद, अमरनाथ प्रसाद और धर्मनाथ पिंटू—ने अपनी मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान कराया. धर्मनाथ पिंटू की पत्नी रागिनी देवी वर्तमान में छपरा नगर निगम की उपमहापौर हैं.

नेत्रदान के समय मौजूद रही आईजीआईएमएस और समिति की टीम

नेत्रदान के दौरान आईजीआईएमएस, पटना में दधीचि देहदान समिति, बिहार प्रदेश की टीम मौजूद रही. इस अवसर पर सिक्किम के पूर्व राज्यपाल एवं समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. गंगा प्रसाद, पद्मश्री विमल जैन, सचिव आनंद प्रधान, उपाध्यक्ष अरुण सत्यमूर्ति, शैलेश महाजन, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुभाष प्रसाद और मीडिया प्रभारी सूरज कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे.

नेत्रदान से किसी जरूरतमंद को मिलेगी नई जिंदगी की रोशनी

पूर्व राज्यपाल डॉ. गंगा प्रसाद ने कहा कि मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से व्यक्ति अपने निधन के बाद भी किसी की आंखों की रोशनी बनकर जीवित रहता है.

समिति के अध्यक्ष संजीव चौधरी ने बताया कि नेत्रदान एक सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है. इसमें पूरी आंख नहीं, बल्कि केवल कॉर्निया (पारदर्शी झिल्ली) लिया जाता है. आई बैंक की विशेषज्ञ टीम मृतक के घर पहुंचकर लगभग आधे घंटे में पूरी प्रक्रिया पूरी कर सकती है. परीक्षण के बाद बच्ची देवी के कॉर्निया का प्रत्यारोपण किसी जरूरतमंद नेत्रहीन को किया जाएगा, जिससे उसे नई रोशनी और बेहतर जीवन मिल सकेगा.

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