जान के साथ-साथ संपत्ति की रक्षा को ले परेशान बाढ़पीड़ित

छपरा (सदर) : बाढ़ प्रभावित सारण के आधा दर्जन से ज्यादा प्रखंडों में अधिकतर बाढ़ प्रभावित अपने जान के साथ-साथ संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर जाने के बाद लगभग 8 लाख की आबादी प्रभावित है. अधिकतर बाढ़ पीड़ित परिवारों की महिलाएं एवं बच्चे अपने सगे-संबंधियों के […]
छपरा (सदर) : बाढ़ प्रभावित सारण के आधा दर्जन से ज्यादा प्रखंडों में अधिकतर बाढ़ प्रभावित अपने जान के साथ-साथ संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर जाने के बाद लगभग 8 लाख की आबादी प्रभावित है. अधिकतर बाढ़ पीड़ित परिवारों की महिलाएं एवं बच्चे अपने सगे-संबंधियों के यहां चले गये है.
लेकिन, हर घर के एक या दो सदस्य बाढ़ के दौरान असामाजिक तत्वों की कारगुजारियों के कारण संपत्ति की रक्षा को ले बाढ़ क्षेत्र में स्थित घरों में रहने को विवश है. 8 लाख की बाढ़ प्रभावित आबादी में से कम से कम 50 हजार परिवार विस्थापित है जिसमें 26 हजार लोग राहत शिविरों में रह रहे है. जिला प्रशासन के द्वारा विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे बाढ़ पीड़ितों को राहत उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है लेकिन, बाढ़ पीड़ित आखिर करें तो क्या करें. उन्हें तो अपने तथा अपने परिवार के जान के अलावे संपत्ति की रक्षा की भी जरूरी है.
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