जुगाड़ पुल के सहारे पटना पहुंच रहे लोग

Published at :18 Jun 2016 3:06 AM (IST)
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जुगाड़ पुल के सहारे पटना पहुंच रहे लोग

महात्मा गांधी सेतु की जर्जरता व जाम की वजह से बढ़ा महत्व, पहलेजा-दीघा रेल पुल भी बना सहारा दिघवारा : पटना-हाजीपुर के मध्य गंगा नदी पर स्थित महात्मा गांधी सेतु पर पिछले कई महीनों से बराबर लगने वाला जाम किसी से छिपा नहीं है और निरंतर लगने वाला जाम अब हर किसी के लिए परेशानियों […]

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महात्मा गांधी सेतु की जर्जरता व जाम की वजह से बढ़ा महत्व, पहलेजा-दीघा रेल पुल भी बना सहारा

दिघवारा : पटना-हाजीपुर के मध्य गंगा नदी पर स्थित महात्मा गांधी सेतु पर पिछले कई महीनों से बराबर लगने वाला जाम किसी से छिपा नहीं है और निरंतर लगने वाला जाम अब हर किसी के लिए परेशानियों का सबब बन गया है. हालत यह है कि जब यात्री पुल पर से यात्रा शुरू करते हैं,
तो किसी को यह पता नहीं होता है कि वे लोग कब तक अपने गंतव्य स्थानों तक पहुंच सकेंगे? इतना ही नहीं इन दिनों हर जुबान पर पटना पुल पर लगने वाले निरंतर व भीषण जाम की चर्चा सुनने को मिलती है. पिछले दिनों शुक्रवार को पुल के पाया नंबर 46 के पास एक स्पैन के धंस जाने की खबर ने यात्रियों के हौसले को और भी कमजोर किया है.
आम लोगों के बीच इस सवाल की भी चर्चा खूब है कि अगर लोगों ने दिघवारा के सामने गंगा नदी पर ‘जुगाड़ पुल’ का इजाद नहीं किया होता, तो न जाने सारण प्रमंडल के विभिन्न जिलों के प्रखंडों में रहनेवाले लोग राज्य की राजधानी तक कैसे पहुंच पाते? जुबानी चर्चा यह भी है कि अगर दीघा-पहलेजा रेल पुल का उद्घाटन नहीं हुआ होता,
तो न जाने उत्तर बिहार के कई जिलों के यात्री अपने कार्यों को संपादित करने कैसे व कितने घंटे में राजधानी तक पहुंच पाते? बहरहाल सच्चाई यही है कि इन दोनों पुलों ने न केवल गांधी सेतु पर वाहनों व यात्रियों के दबाव को कम किया है, बल्कि यात्रियों को जाम से जाम से मुक्ति दिलाने के साथ यात्रा भी सुलभ बनायी है.
जुगाड़ पुल नहीं होता तो चौपट हो जाता रोजगार व कैरियर : पुल जाम होने की स्थिति में जिले के कई प्रखंडों के व्यापारी इसी मार्ग से पिकअप व अन्य वाहनों से अपनी दुकानों का माल पटना के बाजारों से खरीद लाते हैं. उनलोगों के धंधे पर गांधी सेतु के जाम का ज्यादा असर नहीं पड़ता है और धंधा चौपट होने से बच जाता है. वहीं परीक्षा देने के लिए सीजन भर परीक्षार्थी इसी मार्ग का सहारा लेते हैं तथा नौकरीपेशा लोग इसी रास्ते से राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से जिले के विभिन्न प्रखंडों में आकर ड्यूटी करते हुए शाम तक पटना लौट जाते हैं.
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