विकलांगों के लिए रोल मॉडल बन सकती है दिघवारा की रेशम

Published at :27 Dec 2013 10:07 PM (IST)
विज्ञापन
विकलांगों के लिए रोल मॉडल बन सकती है दिघवारा की रेशम

दिघवारा (सारण) ‘‘मंजिल उसी को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है’’ जीवन के इसी फलसफे को पूरी तरह चरितार्थ कर रही है सारण जिले के दिघवारा नगर पंचायत अधीन वार्ड सात के निवासी राम बाबू महतो की 14 वर्षीया पुत्री व दाहिने पैर […]

विज्ञापन

दिघवारा (सारण)

‘‘मंजिल उसी को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है’’ जीवन के इसी फलसफे को पूरी तरह चरितार्थ कर रही है सारण जिले के दिघवारा नगर पंचायत अधीन वार्ड सात के निवासी राम बाबू महतो की 14 वर्षीया पुत्री व दाहिने पैर से विकलांग रेशम. जब उस लड़की के सपने देखने की उम्र शुरू हो रही थी, तभी खादी भंडार के समीप एक तेज रफ्तार की ट्रक ने रेशम को अपनी चपेट में ले लिया. जीवन की इसी घटना ने रेशम से उसकी खुशियों के साथ उसका दाहिना पैर भी हमेशा के लिए छीन लिया. पिता की आर्थिक आमदनी इतनी नहीं थी कि बेटी को बैसाखी भी नसीब हो सके. बस क्या था, समझदार व गंभीर स्वभाव की रेशम ने फिर न तो अपनी किस्मत को कोसा और न ही हिम्मत हारी. पैर गंवानेवाली घटना को नियति का खेल मान कर जीवन में कुछ कर गुजरने के जज्बे के साथ आगे बढ़ चली. विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बना कर रेशम आज भी अपनी पढ़ाई जारी रखी हुई है. उसे उम्मीद है कि वह पढ़ लिख कर नौकरी प्राप्त करेगी, तो उसके जीवन का कष्ट दूर होगा. रेशम की इसी जीवन सोच ने उसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनाया है.

सड़क दुर्घटना ने अरमानों पर फेरा पानी

रेशम जब छह वर्ष की थी तभी खादी भंडार के सामने एक ट्रक की चपेट में आने से वह जिंदगी भर के लिए विकलांग बन गयी. इसी घटना ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. वहीं उसके पिता राम बाबू महतो वाहनों में घूम -घूम कर भूंजा बेचते हैं. किसी तरह बहन व एक भाई सहित मां का पेट भर पाता है. बैसाखी खरीदने की कई बार हिम्मत की मगर हर बाद आर्थिक बदहाली खरीदने के मार्ग में बाधा बनी.

जीवट के साथ कर रही है पढ़ाई

विकलांग रेशम जब किसी को स्कूल जाते देखती तो उसे भी पढ़ने का मन करता. मगर शुरुआत में परिवारवालों ने उसे विकलांगता का हवाला देते हुए पढ़ने से मना किया. मगर जब रेशम ने जिद पकड़ी तो हर किसी को हार माननी पड़ी. प्रावि सयानी मंदिर टोले राइपट्टी से पांचवीं पास करने के बाद कन्या मवि दिघवारा से आठवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की.वर्तमान में कन्या उवि, दिघवारा में वर्ग नवम में पढ़ रही है. पैसे के अभाव में बैसाखी नहीं खरीद सकनेवाली रेशम प्रत्येक दिन खादी भंडार अवस्थित पनी कुटिया से शंकरपुर रोड अवस्थित हाइ स्कूल तक एक पैर से लंगड़ाती जाती है. मुख्य बाजार से हाथ में बस्ता दबा कर लंगड़ाते जानेवाली रेशम के जज्बे की तारीफ हर कोई करता है. वहीं विकलांगों के लिए चलायी जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी लोग प्रश्नचिह्न् लगाते हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन